मध्य प्रदेश में बाल कल्याण समितियों के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह नई व्यवस्था लागू होगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य की बाल कल्याण समितियों (CWC) के कामकाज को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में उठाया गया है।
भोपाल से जारी आदेश में कहा गया है कि बाल कल्याण समितियों की बैठकों और सदस्यों की उपस्थिति को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए अब Aadhaar Enabled Biometric Attendance System लागू किया जाएगा। यही वजह है कि MP Biometric Attendance Order चर्चा में है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फैसला
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक याचिका के संदर्भ में जारी किया गया है। अदालत ने बाल संरक्षण संस्थाओं में बैठकों के नियमित संचालन और सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। दरअसल, कई जिलों में बैठकों के संचालन और मॉनिटरिंग को लेकर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में अब सरकार ने डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य करने का फैसला लिया है।
क्या-क्या होंगे नए नियम?
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक जिले के बाल कल्याण समिति कार्यालय में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके तहत
- समिति अध्यक्ष और सदस्यों की उपस्थिति डिजिटल तरीके से दर्ज होगी।
- हर महीने निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- बैठकों का संचालन बाल-अनुकूल वातावरण में करना होगा।
- Mixed Sitting व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि समिति की कार्यप्रणाली संतुलित रहे।
अब समझिए, इसका मकसद सिर्फ उपस्थिति दर्ज करना नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
वर्किंग सिस्टम और जवाबदेही पर रहेगा फोकस
आदेश में यह भी कहा गया है कि समिति के सदस्य अवकाश के दिनों में भी जरूरत पड़ने पर उपलब्ध रहें और अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम में दर्ज करें। इसके अलावा बैठकों के दौरान सिर्फ उन्हीं लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया है जिनका संबंधित प्रकरण से सीधा जुड़ाव हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के साथ संवेदनशील और मित्रवत व्यवहार बनाए रखा जाए।
जिलों को भेजे गए सख्त निर्देश
महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है फिलहाल, विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित होगी। साथ ही बच्चों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निगरानी भी बेहतर हो सकेगी।