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MP Village Fines Abuse, Unique Punishment Goes Vir

एमपी का ये गांव दे रहा नई दिशा: गाली-गलौज पर सख्ती, बदल रही सोच और माहौल

बुरहानपुर का बोरसर गांव गाली-गलौज पर जुर्माना और सफाई की सजा के नियम से चर्चा में है, यह पहल सामाजिक बदलाव की मिसाल बन रही है।


एमपी का ये गांव दे रहा नई दिशा गाली-गलौज पर सख्ती बदल रही सोच और माहौल

बुरहानपुर: आज के दौर में फिल्मों से लेकर वेब सीरीज तक और राजनीति की बहसों से लेकर आम बातचीत तक, गाली-गलौज जैसे आम होती जा रही है। ऐसे माहौल के बीच मध्यप्रदेश का एक गांव समाज को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है। बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव अपनी अनोखी पहल के कारण चर्चा में है।

संस्कारों से शुरू हुआ बदलाव

करीब 6 हजार आबादी वाले इस गांव के लोगों ने तय किया कि बदलाव की शुरुआत भाषा से होगी। ग्रामीणों का मानना है कि संस्कार की शुरुआत परिवार से होती है और भाषा उसका पहला आईना होती है। इसी सोच के साथ गांव को “गाली मुक्त” बनाने का निर्णय लिया गया।

गाली देने पर जुर्माना और सफाई की सजा

ग्राम पंचायत ने नियम बनाकर गाली-गलौज पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही उसे एक घंटे तक गांव में झाड़ू लगाकर सफाई करनी होती है। यह नियम गांव के हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू है।

सोच और व्यवहार में दिख रहा बदलाव

इस पहल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। गांव में केवल भाषा ही नहीं बदली, बल्कि लोगों का व्यवहार और आपसी संबंध भी सकारात्मक हुए हैं। छोटे-छोटे विवादों में कमी आई है और सामाजिक माहौल पहले की तुलना में बेहतर हुआ है।

विकास की ओर बढ़ता गांव

बोरसर गांव में सामाजिक सुधार के साथ-साथ विकास के अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं। यहां बच्चों के लिए पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है, ताकि वे शिक्षा की ओर प्रेरित हों। जरूरतमंदों के लिए सेवा भवन बनाया गया है और गांव में चार स्थानों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा “हर घर हरियाली” अभियान के तहत पौधारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काम हो रहा है।

सामूहिक प्रयास बना मिसाल

गांव के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर शुरू हुआ यह अभियान आज एक सफल मॉडल के रूप में सामने आ रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि एक छोटा सा संकल्प पूरे समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। बोरसर गांव की यह पहल अब अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रही है, जहां सामूहिक प्रयास से सामाजिक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

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