एमपी के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्वदेश से विशेष बातचीत की। उन्होंने 5500 शिक्षकों की भर्ती, नई शिक्षा नीति, टेंपल मैनेजमेंट MBA और दतिया उपचुनाव पर खुलकर बातचीत की।
भोपाल। मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में आने वाले समय में कई ऐसे बदलाव दिख सकते हैं जो अब तक राज्य के विश्वविद्यालयों में नहीं दिखाई दिए। सरकार एक तरफ नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने में जुटी है तो दूसरी ओर ऐसे पाठ्यक्रम तैयार कर रही है जिन्हें सीधे रोजगार, संस्कृति और बदलती जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्वदेश न्यूज़ को विशेष इंटरव्यू दिया। उन्होंने कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती से लेकर परीक्षा प्रणाली, रिसर्च, निजी कॉलेजों की जांच, भारतीय भाषाओं और मंदिर प्रबंधन जैसे कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। पेश हैं बातचीत के प्रमुख सवाल और उनके जवाब।
सवाल: नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव क्या माना जाए?
जवाब: इंदर सिंह परमार का कहना है कि यह बदलाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था को भारत की जरूरतों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ती है। उनका मानना है कि पहले की नीतियों में विदेशी मॉडल का प्रभाव अधिक था, जबकि नई नीति सीखने की क्षमता, गुणवत्ता आधारित शिक्षा और भारतीय दृष्टिकोण पर जोर देती है। सरकार का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी समझें।
सवाल: सरकार ने टेंपल मैनेजमेंट को MBA पाठ्यक्रम से जोड़ने का फैसला क्यों लिया?
जवाब: शिक्षा मंत्री के मुताबिक प्रदेश के बड़े मंदिरों में हर साल करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मंदिर प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी। इसी जरूरत को देखते हुए एक विश्वविद्यालय में टेंपल मैनेजमेंट MBA शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना है जो भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाएं, धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक आयोजन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को आधुनिक तरीके से संचालित कर सकें। सरकार का मानना है कि इससे महाकाल सहित प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी।
सवाल: विश्वविद्यालयों में 13 भारतीय भाषाएं जोड़ने का उद्देश्य क्या है?
जवाब: मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश के विद्यार्थी बड़ी संख्या में देश के दूसरे राज्यों में पढ़ाई और नौकरी के लिए जाते हैं। ऐसे में केवल हिंदी और अंग्रेजी तक सीमित रहने के बजाय उन्हें तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, बंगाली, पंजाबी, सिंधी, मणिपुरी जैसी भारतीय भाषाओं का बुनियादी ज्ञान भी मिलना चाहिए। इन भाषाओं को क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा ताकि विद्यार्थी जिस राज्य में जाएं, वहां की भाषा और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझ सकें। सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और रोजगार दोनों के नजरिए से महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
सवाल: सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसे दूर करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
जवाब: शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2022 की भर्ती अंतिम चरण में है और लोक सेवा आयोग से सूची मिलने के बाद नियुक्तियां शुरू की जा रही हैं। इसके साथ ही वर्ष 2024 की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। करीब 5,500 पदों पर सहायक प्राध्यापक, लाइब्रेरियन और खेल अधिकारियों की भर्ती की जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया एक बार की नहीं होगी। जब तक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जरूरत पूरी नहीं हो जाती, तब तक भर्ती का क्रम जारी रहेगा। विश्वविद्यालयों को भी जल्द अपनी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल: उच्च शिक्षा में डिजिटल मूल्यांकन और नई परीक्षा व्यवस्था से विद्यार्थियों को क्या फायदा मिलेगा?
जवाब: मंत्री का कहना है कि सरकार तीन चीजों पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। इसमें समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम शामिल है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था बदली गई है। निजी कॉलेजों की जगह सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है। जहां जरूरत पड़ी वहां निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं। अब डिजिटल मूल्यांकन के जरिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच तेज होगी और परिणाम कम समय में जारी किए जा सकेंगे।
सवाल: निजी कॉलेजों की गुणवत्ता और फर्जी संस्थानों को लेकर सरकार की क्या रणनीति है?
जवाब: इंदर सिंह परमार ने बताया कि इस बार सरकार ने निजी कॉलेजों की विशेष जांच कराई। इसके लिए अलग समिति बनाई गई, जिसने मानकों की समीक्षा की। जांच में जिन संस्थानों में गंभीर गड़बड़ियां मिलीं, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कुछ कॉलेजों की मान्यता समाप्त हो चुकी है और कुछ मामलों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार चाहती है कि प्रवेश शुरू होने से पहले ही सभी संस्थानों की जांच पूरी कर ली जाए, ताकि केवल योग्य कॉलेजों में ही छात्रों का दाखिला हो।
सवाल: तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को लेकर सरकार की आगे की योजना क्या है?
जवाब: मंत्री ने बताया कि अब पाठ्यक्रमों को केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। जिस क्षेत्र में जिस उद्योग की जरूरत है, उसी के अनुरूप कोर्स तैयार किए जा रहे हैं। सतना में सीमेंट टेक्नोलॉजी, खनन क्षेत्रों में माइनिंग से जुड़े विषय और उद्योगों की जरूरत के अनुसार अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम विकसित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि एग्रीकल्चर जैसे विषयों में भी विद्यार्थियों की रुचि तेजी से बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को सीधे रोजगार और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिले।
सवाल: यदि अगले दो वर्ष की बात करें तो उच्च शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा फोकस किस पर रहेगा?
जवाब: मंत्री ने स्पष्ट किया कि सबसे पहले शिक्षकों की भर्ती पूरी करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाना, डिजिटल मूल्यांकन को मजबूत करना, विश्वविद्यालयों में रिसर्च को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करना भी प्रमुख लक्ष्य हैं। उनका कहना है कि सरकार ऐसे बदलाव करना चाहती है, जिनका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिले और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार दिखाई दे।
सवाल: दतिया उपचुनाव और भाजपा संगठन को लेकर आपका क्या कहना है?
जवाब: इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में संगठन सर्वोपरि है और निर्णय होने के बाद सभी नेता और कार्यकर्ता उसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास के मुद्दे पर जनता एक बार फिर भाजपा का समर्थन करेगी। उनके अनुसार प्रदेश में सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में हुए बदलाव ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत हैं और जनता इन्हीं कामों के आधार पर अपना फैसला करेगी।