मध्यप्रदेश में 12 हजार शिक्षक जो स्कूलों की बजाय दफ्तरों में काम कर रहे हैं, उनके जून के वेतन पर रोक लगाई गई है। सरकार ने इसे गंभीर अनियमितता माना है।
मध्यप्रदेश में 12 हजार सरकारी शिक्षक अपनी पाठशाला में पढ़ाने की बजाय विभागीय मुख्यालयों के दफ्तरों और मंत्रालयों में जमे हुए हैं। प्रतिनियुक्त इन शिक्षकों ने वर्षों से स्कूल का मुंह नहीं देखा है। इन प्रतिनियुक्तियों की वजह से राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी देखी जा रही है। कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जो पिछले 17 वर्षों से विभिन्न विभागों के कार्यालयों में प्रतिनियुक्त हैं।
फिलहाल, स्कूल छोड़कर मुख्यालयों और दूसरे विभागों में वर्षों से जमे शिक्षकों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त ने ऐसे शिक्षकों का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं, जो मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में सेवाएं देने के बजाय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। सरकारी स्कूलों में पदस्थ सैकड़ों शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी भी दर्ज नहीं कर रहे हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूलों से अनधिकृत दूरी और ई-अटेंडेंस की अनदेखी अब स्वीकार नहीं होगी। निर्देश के बाद ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उनका वेतन रोका जाएगा। साथ ही विभाग में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए तत्काल अटैच शिक्षकों का जून माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
आयुक्त अभिषेक सिंह ने शुक्रवार को डीपीआई में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि स्कूलों में पदस्थ होकर अन्य संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों का वेतन रोका जाए। राजधानी में ऐसे एक दर्जन से अधिक शिक्षक हैं, जो पढ़ाने के बजाय मंत्रालय, एसडीएम कार्यालय और अन्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं।
भोपाल जिले में 14 प्रतिशत शिक्षक व्यवस्था से बाहर
भोपाल जिले में करीब 620 शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज नहीं हो रही है। जिले में करीब 4,300 शिक्षक एवं कर्मचारी पदस्थ हैं। इनमें लगभग 200 लिपिक और अन्य कार्यालयीन कर्मचारी शामिल हैं। करीब 14 प्रतिशत शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के करीब 12 हजार से अधिक शिक्षक गैर-शैक्षणिक और लिपिकीय कार्यों के लिए अन्य विभागों, जैसे राज्य शिक्षा केंद्र, बीईओ कार्यालय, संकुल केंद्र, बीएसी कार्यालय, डाइट, कलेक्ट्रेट, पंचायत और निर्वाचन आयोग आदि में अटैच हैं। इस वजह से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है।
ई-अटेंडेंस के सत्यापन के बाद ही बनेगा वेतन
बैठक में आयुक्त ने प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों को भी निर्देश दिए कि वे वेतन आहरण देयक तैयार करने से पहले ई-अटेंडेंस का सत्यापन करें। बिना सत्यापन के वेतन भुगतान नहीं किया जाएगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।जो शिक्षक दूसरे विभागों में पदस्थ हैं, उनका अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए। ऐसे शिक्षकों का वेतन आगामी आदेश तक रोका जाएगा। डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब अटैचमेंट व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।