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मध्यप्रदेश में UCC ड्राफ्ट तैयार

मध्यप्रदेश UCC ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, बिना पंजीयन रहने पर सजा की सिफारिश

मध्यप्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। UCC ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, बहुविवाह पर नए नियम सुझाए गए हैं।


मध्यप्रदेश ucc ड्राफ्ट तैयार लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य बिना पंजीयन रहने पर सजा की सिफारिश

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट सौंप दिया है। अब इस ड्राफ्ट को कानूनी परीक्षण के लिए विधि विभाग को भेजा गया है। सरकार इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर सकती है।ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीयन, सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीयन, कोर्ट से ही तलाक की मान्यता और बहुविवाह पर रोक जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं

लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन होगा अनिवार्य

ड्राफ्ट के अनुसार, यदि कोई वयस्क जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे अपने संबंध का रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के बाद रजिस्ट्रार इसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने को भेजेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अभिभावकों को भी इसकी सूचना देने का प्रावधान रख सकती है।यदि कोई जोड़ा बिना पंजीयन लिव-इन में रहता है, तो इसे अपराध की श्रेणी में रखते हुए दंड या जेल का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीयन अनिवार्य

ड्राफ्ट में सिफारिश की गई है कि सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य हो। विवाह के 30 से 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है।

कोर्ट से ही तलाक होगा मान्य

समिति ने सुझाव दिया है कि किसी भी धर्म में केवल अदालत से प्राप्त तलाक को ही कानूनी मान्यता मिले। मौखिक या प्रथागत तलाक की व्यवस्था को समाप्त कर उसे दंडनीय बनाने की सिफारिश की गई है।

बहुविवाह पर पूरी तरह रोक

ड्राफ्ट के अनुसार, पति या पत्नी के जीवित रहते या कानूनी तलाक से पहले दूसरी शादी करना अपराध माना जाएगा। यह नियम सभी धर्मों पर समान रूप से लागू करने की सिफारिश की गई है।

संपत्ति में बेटा-बेटी को समान अधिकार

ड्राफ्ट में उत्तराधिकार के मामलों में बेटियों और बेटों को समान कानूनी अधिकार देने की बात दोहराई गई है। प्रस्ताव है कि यह व्यवस्था सभी धर्मों पर समान रूप से लागू हो।

आदिवासी और विशेष पिछड़ी जातियां रहेंगी बाहर

समिति ने सिफारिश की है कि आदिवासी समुदायों तथा कुछ संकटग्रस्त और विशेष पिछड़ी जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी इस संबंध में संकेत दे चुके हैं।

404 धाराओं वाला है ड्राफ्ट

समिति का ड्राफ्ट तीन भागों में तैयार किया गया है।

  • पहले भाग में 10 अध्यायों के माध्यम से समिति की सिफारिशें और कानूनी विश्लेषण शामिल हैं।
  • दूसरे भाग में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियों वाला विधेयक प्रारूप तैयार किया गया है।
  • तीसरे भाग में 9.58 लाख से अधिक जन सुझावों का विश्लेषण और जनपरामर्श रिपोर्ट शामिल है।

अभी अंतिम कानून नहीं बना है

सरकार ने ड्राफ्ट को विधि विभाग के परीक्षण के लिए भेजा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले सरकार इसमें संशोधन कर सकती है। इसलिए ड्राफ्ट में शामिल सभी सिफारिशें अंतिम कानून का हिस्सा होंगी, यह अभी तय नहीं है।

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