मध्यप्रदेश में मानसून की कमजोरी के कारण केवल 30% खरीफ फसल की बोवनी हुई है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ी है। राज्य सरकार और केंद्र को राहत योजना पर ध्यान देने की जरूरत है।
मध्यप्रदेश में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। प्रदेश में सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसकी वजह से किसान खरीफ फसलों की समुचित बोवनी या उसकी तैयारी नहीं कर सके हैं।
30 जून तक पूरे प्रदेश में औसतन केवल 30 प्रतिशत के करीब ही बोवनी हो पाई है। दक्षिण और पश्चिमी जिलों को छोड़कर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान बुवाई को लेकर चिंतित हैं। राज्य के 30 से अधिक जिलों में जून के दौरान सूखे जैसे हालात बने रहे हैं।
सिंचाई के साधन न हों तो धान की खेती न करें
कृषि विभाग के उप संचालक सुमन प्रसाद ने बताया कि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि इस बार कमजोर मानसून को देखते हुए धान के बजाय मूंग, उड़द और अरहर का रकबा बढ़ाएं। जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वे धान की खेती कम करें।इसके साथ ही भोपाल जिले के सोयाबीन उत्पादक किसानों को 15 जुलाई तक इंतजार करने की सलाह दी गई है। हालांकि भोपाल में सोयाबीन की बोवनी लायक बारिश हो चुकी है। विभाग की नजर मानसून के पूर्वानुमानों पर बनी हुई है। आने वाले समय में बारिश की उपलब्धता के आधार पर किसानों के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की जाएगी।
केंद्र और राज्य सरकार तुरंत राहत योजना बताए: कमलनाथ
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि कम बारिश की आशंका के कारण देश का कृषि क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस स्थिति से निपटने के लिए क्या राहत योजना तैयार की गई है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अल्प वर्षा के कारण खरीफ की बुवाई 23 प्रतिशत पिछड़ गई है और धान का रकबा 25 प्रतिशत घट गया है। सोयाबीन, अरहर और मूंगफली की खेती पर भी इसका असर पड़ा है।