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मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

उमरिया से सतना तक व्यवस्था पर सवाल: कहीं प्रसूता को डेढ़ किमी उठाकर ले जाना पड़ा, तो कहीं स्टेशन पर हुआ प्रसव

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की कमी के कारण दो गंभीर घटनाएं हुईं, जिसमें प्रसूताओं को भारी परेशानी हुई।


उमरिया से सतना तक व्यवस्था पर सवाल कहीं प्रसूता को डेढ़ किमी उठाकर ले जाना पड़ा तो कहीं स्टेशन पर हुआ प्रसव

मध्यप्रदेश में बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शनिवार को दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उमरिया जिले में अधूरी सड़क के कारण ग्रामीणों को प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथ-पैर पकड़कर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ा। वहीं सतना रेलवे स्टेशन पर समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने से एक गर्भवती महिला ने प्रतीक्षालय में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

उमरिया: डेढ़ किलोमीटर तक उठाकर ले गए ग्रामीण

उमरिया जिले की करकेली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत देवरा में सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण गर्भवती मालती कोल को प्रसव पीड़ा के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन खराब और कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी और राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर ही रुक गई। इसके बाद ऑटो से महिला को ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन वह भी रास्ते में फंस गया।आखिरकार ग्रामीणों ने महिला को हाथ-पैर पकड़कर करीब 1.5 किलोमीटर तक उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से एंबुलेंस के जरिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंदिया ले जाया गया, जहां उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।

चार साल बाद भी अधूरी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में प्रधानमंत्री जनमन सड़क योजना के तहत लगभग चार वर्ष पहले सड़क निर्माण स्वीकृत हुआ था। करीब आठ महीने पहले काम शुरू हुआ, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका। आरोप है कि जहां पहले से सीसी सड़क थी, वहीं निर्माण कराया गया, जबकि जरूरत वाले हिस्से को अधूरा छोड़ दिया गया।घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सड़क निर्माण और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

सतना: रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय में हुआ प्रसव

दूसरी घटना सतना रेलवे स्टेशन की है, जहां शनिवार तड़के प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला ने समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण स्टेशन के महिला प्रतीक्षालय में ही नवजात को जन्म दिया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिला की हालत बिगड़ने पर यात्रियों ने जननी एक्सप्रेस को फोन किया, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। मौके पर मौजूद महिलाओं ने ही प्रसूता की मदद की और सुरक्षित प्रसव कराया।कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला अस्पताल ले जाने के लिए पैसे मांगे गए। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जच्चा-बच्चा की स्थिति स्पष्ट नहीं

महिला की पहचान खुशबू के रूप में बताई जा रही है। बताया गया कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल ले जाया गया या नहीं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसे लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

दोनों घटनाओं ने उठाए बड़े सवाल

इन दोनों मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, समय पर एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने अधूरी सड़क का निर्माण जल्द पूरा कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

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