मध्यप्रदेश में पिछले 5 वर्षों में पीएचडी प्रवेशों की संख्या दोगुनी हो गई है। छात्राओं की भागीदारी में भी 111% की वृद्धि हुई, जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ी उपस्थिति दिखाई देती है।
मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र से उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के अनुसार राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान पीएचडी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या दोगुने से भी अधिक हो गई है। खास बात यह है कि शोध के क्षेत्र में छात्राओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति का संकेत मिलता है।
पांच साल में 110% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में राज्य के 5,447 विद्यार्थियों ने पीएचडी में प्रवेश लिया था। यह संख्या 2023-24 में बढ़कर 11,426 पहुंच गई। यानी पांच वर्षों में 5,979 नए शोधार्थी जुड़े और कुल प्रवेश में करीब 110 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
2023-24 में सबसे बड़ी छलांग
पीएचडी प्रवेश में सबसे अधिक वृद्धि 2023-24 में दर्ज की गई। इस वर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 7,932 से बढ़कर 11,426 हो गई, जो एक वर्ष में लगभग 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यह पिछले पांच वर्षों की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि मानी जा रही है।
शोध में बेटियों की बढ़ी भागीदारी
आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में 3,006 छात्र और 2,441 छात्राओं ने पीएचडी में प्रवेश लिया था। वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर क्रमशः 6,275 और 5,151 हो गई।
पांच वर्षों में:
पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों में पीएचडी में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की हिस्सेदारी कुल प्रवेश का लगभग 45 प्रतिशत रही, जो शोध के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
वर्षवार पीएचडी प्रवेश
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शैक्षणिक वर्ष
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कुल प्रवेश
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2019-20
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5,447
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2020-21
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6,153
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2021-22
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7,854
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2022-23
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7,932
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2023-24
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11,426
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पांच वर्षों की तस्वीर
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कुल पीएचडी प्रवेश: 38,812
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छात्र: 21,604 (55.7%)
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छात्राएं: 17,208 (44.3%)
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2023-24 में अकेले पांच वर्षों के कुल प्रवेश का करीब 29.4 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया, जो इस अवधि का सबसे बड़ा योगदान है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शोध के प्रति बढ़ती रुचि, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान के बेहतर अवसर और सरकारी प्रोत्साहन के कारण मध्यप्रदेश में शोध संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है। इससे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।