Breaking News
  • स्वदेश के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश में मानसून सुस्त

MP Weather: मध्यप्रदेश में थमा मानसून, 52 जिले सूखे; बादल आए लेकिन बरसे नहीं

मध्यप्रदेश में मानसून की गतिविधियाँ लगभग थम गई हैं। प्रदेश के 52 जिले सूखे हैं और केवल तीन जिलों में हल्की वर्षा हुई।


mp weather मध्यप्रदेश में थमा मानसून 52 जिले सूखे बादल आए लेकिन बरसे नहीं

मध्यप्रदेश में मानसून फिलहाल सुस्त पड़ गया है। पिछले दो दिनों से बारिश की गतिविधियां लगभग थम गई हैं। बीते 24 घंटे में प्रदेश के 55 में से केवल तीन जिलों मऊगंज, सीधी और अनूपपुर में ही नाममात्र की बारिश दर्ज की गई, जबकि 52 जिले पूरी तरह सूखे रहे। सबसे खास बात यह रही कि दिनभर कई इलाकों में बादल छाए रहे, लेकिन अधिकांश स्थानों पर वे बिना बरसे ही गुजर गए।

प्रदेश में कुल बारिश सामान्य, लेकिन पूर्वी MP चिंता में

पिछले 24 से 36 घंटों में सबसे अधिक वर्षा की कमी पश्चिमी मध्यप्रदेश में देखने को मिली, जहां एक भी जिले में बारिश दर्ज नहीं हुई। वहीं, पूर्वी मध्यप्रदेश में भी केवल मऊगंज, सीधी और अनूपपुर में हल्की फुहारें पड़ीं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में व्यापक वर्षा की संभावना नहीं है। कहीं-कहीं हल्की या छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल तेज और व्यापक बारिश के संकेत नहीं हैं।

पूर्वी मध्यप्रदेश में 14% वर्षा की कमी

हालांकि, मौजूदा सुस्ती के बावजूद मानसून सीजन के समग्र आंकड़े अभी भी संतोषजनक बने हुए हैं। जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश के कारण प्रदेश का कुल वर्षा संतुलन सामान्य बना हुआ है। 1 जून से 12 जुलाई के बीच मध्यप्रदेश में 241.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 239.8 मिमी है। कुल मिलाकर अब तक प्रदेश में सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

पूर्वी मध्यप्रदेश अभी भी वर्षा घाटे में

आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश में अब तक 232.7 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य 269.7 मिमी की तुलना में 14 प्रतिशत कम है। रीवा, मैहर, नरसिंहपुर, मंडला, शहडोल, सिंगरौली और सीधी जैसे जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज हुई है। विशेष रूप से मैहर (-53 प्रतिशत) और रीवा (-52 प्रतिशत) में सबसे अधिक कमी बनी हुई है, जिससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

फिर भी यह संतुलन पूरे प्रदेश में समान नहीं है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में मानसून अब तक सामान्य से बेहतर प्रदर्शन कर चुका है और वहां औसत से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पूर्वी मध्यप्रदेश अभी भी 14 प्रतिशत वर्षा घाटे से जूझ रहा है। रीवा, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और आसपास के जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की निगाहें अब जुलाई के दूसरे पखवाड़े पर टिकी हैं। फिलहाल अगले कुछ दिन हल्की और छिटपुट बारिश के साथ ही गुजरने के आसार हैं।

सर्वाधिक वर्षा वाले 5 जिले

  • देवास – 454.3 मिमी
  • हारदा – 379.4 मिमी
  • सीहोर – 354.9 मिमी
  • इंदौर – 353.4 मिमी
  • भोपाल – 327.4 मिमी

सबसे कम वर्षा वाले 5 जिले

  • अलीराजपुर – 59.4 मिमी
  • रीवा – 111.7 मिमी
  • मैहर – 118.0 मिमी
  • मुरैना – 129.2 मिमी
  • दतिया – 139.1 मिमी

पश्चिमी मध्यप्रदेश में स्थिति संतोषजनक

जहां तक पश्चिमी मध्यप्रदेश का सवाल है, यहां मानसून मेहरबान रहा है। यहां अब तक 248.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य 216.7 मिमी से 15 प्रतिशत अधिक है। देवास, इंदौर, भोपाल, हारदा, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन और बुरहानपुर सहित कई जिलों में सामान्य से अच्छी बारिश हुई है। सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन देवास का रहा, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश का कुल वर्षा संतुलन फिलहाल सामान्य बना हुआ है, लेकिन पूर्वी मध्यप्रदेश में अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होना जरूरी होगा, ताकि वहां बना वर्षा घाटा कम हो सके और खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके।

Related to this topic: