मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार कम होने के कारण विभिन्न क्षेत्रों में असमान वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे कृषि और जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश में मौसम के दो रंग साफ तौर पर दिख रहे हैं। प्रदेश के एक हिस्से में बादल जमकर बरस रहे हैं, तो दूसरे हिस्से में सूरज अब भी आग उगल रहा है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि सीधी, उमरिया और मंडला में भीषण लू ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हैरानी की बात यह है कि मानसून अभी भी प्रदेश के आधे हिस्से में ही ठहरा हुआ है। मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने के साथ-साथ मानसून के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना जताई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मध्यप्रदेश के शेष हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। प्रदेश में सक्रिय चक्रवाती परिस्थितियों के कारण कई जिलों में अच्छी बारिश हो रही है। शनिवार-रविवार की रात पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई, जबकि पूर्वी हिस्सों में 7 से 11 सेंटीमीटर बारिश हुई। देवास, इंदौर, राजगढ़, आगर-मालवा और सिवनी में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। शिवपुरी में 67 मिमी और भोपाल में 35 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
मंडला में भीषण लू का कहर जारी
दूसरी ओर, सीधी और उमरिया में रविवार को भी अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जबकि मंडला में पारा सामान्य से पांच डिग्री ऊपर पहुंच गया। ग्वालियर संभाग में भी गर्मी का असर बना रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।
आईएमडी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के सीधी और उमरिया में जबरदस्त लू का असर जारी है। रविवार को भी यहां अधिकतम तापमान सामान्य से औसतन चार डिग्री अधिक दर्ज किया गया। वहीं मंडला में भी भीषण लू का कहर जारी है। यहां रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया। ग्वालियर में भी दिन का पारा 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है।
मध्यप्रदेश में बारिश का असमान वितरण
मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार इस बार सुस्त पड़ी हुई है। 1 जून से 28 जून 2026 के बीच प्रदेश में बारिश दीर्घकालिक औसत से 38 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में हालात और गंभीर दिखाई दे रहे हैं, जहां बारिश सामान्य से 67 प्रतिशत तक कम हुई है। जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में इस बार मानसून अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है, जिससे कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी हिस्से में सबसे अधिक बारिश की कमी दर्ज हुई है, जिससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
पश्चिमी मप्र में स्थिति बेहतर
वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश में अपेक्षाकृत स्थिति बेहतर रही, लेकिन वहां भी औसत से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। कुल मिलाकर पूरे प्रदेश में मानसून सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज नहीं हुईं, तो खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास पर असर पड़ सकता है।