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मानसून की देरी से संकट

मानसून की बेरुखी से तड़पा मप्र, 41 जिले अब भी बारिश को तरसे

मध्य प्रदेश में मानसून की देरी से कई जिलों में सूखे जैसे हालात, खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित, जुलाई की बारिश पर टिकी उम्मीदें।


मानसून की बेरुखी से तड़पा मप्र 41 जिले अब भी बारिश को तरसे

आसमान में बादल, धरती पर प्यास, मानसून की सुस्ती से लोग बेहाल

दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल फिलहाल थमी हुई है, लेकिन इंतजार अब ज्यादा लंबा नहीं है। अगले एक-दो दिनों में मानसून मध्य प्रदेश के कई नए इलाकों के साथ उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। यदि मौसमी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो सप्ताह के आखिर तक दिल्ली में भी मानसून की बहुप्रतीक्षित दस्तक हो सकती है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार मानसून फिर से गति पकड़ने को तैयार है। जहां तक मध्य प्रदेश का सवाल है, 41 जिलों में मानसून अब भी रूठा हुआ है। मालवा और भोपाल संभाग के कुछ जिलों को छोड़ दें तो समूचे ग्वालियर-चंबल संभाग, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और सतपुड़ा क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में जून महीने में अब तक नाममात्र की बारिश हुई है।

कुछ जिलों को छोड़ दें तो पूरे प्रदेश में जून महीने के दौरान कमोबेश सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां सामान्य बारिश हुई हो। यहां के अधिकांश जिलों में गंभीर अवर्षा की स्थिति बनी हुई है। पांढुर्णा को छोड़कर शेष सभी जिलों में 50 से 86 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में सामान्य से 68 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में ही संतोषजनक बारिश हुई है।

खरीफ की खेती पर संकट, जुलाई की बारिश पर टिकी उम्मीदें

मानसून की सुस्ती ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और अब किसानों की निगाहें जुलाई की बारिश पर टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो कृषि कार्यों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में सूखे जैसे हालात

पूर्वी मध्य प्रदेश में जून महीने के दौरान सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। पांढुर्णा में सामान्य से 8 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि अधिकांश जिलों में भारी कमी दर्ज की गई है।अनूपपुर में सामान्य से 72 प्रतिशत कम, बालाघाट में 78 प्रतिशत, छतरपुर में 68 प्रतिशत, छिंदवाड़ा में 46 प्रतिशत, दमोह में 77 प्रतिशत, डिंडोरी में 69 प्रतिशत, जबलपुर में 78 प्रतिशत, कटनी में 79 प्रतिशत, मंडला में 72 प्रतिशत, मऊगंज में 71 प्रतिशत, नरसिंहपुर में 83 प्रतिशत, निवाड़ी में 69 प्रतिशत, पन्ना में 74 प्रतिशत, रीवा में 76 प्रतिशत, सागर में 58 प्रतिशत, सतना में 54 प्रतिशत, शहडोल में 71 प्रतिशत, सिंगरौली में 73 प्रतिशत, टीकमगढ़ में 86 प्रतिशत और उमरिया में सामान्य से 68 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ जिलों को राहत

पूर्वी मध्य प्रदेश की तुलना में पश्चिमी मध्य प्रदेश में जून माह में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई है। आगर मालवा में सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक, भोपाल में 44 प्रतिशत अधिक, देवास में 51 प्रतिशत अधिक, इंदौर में 42 प्रतिशत अधिक और नीमच में 51 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।हालांकि कई जिलों में यहां भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उदाहरण के लिए अलीराजपुर में जून माह में अभी तक दो मिलीमीटर बारिश भी दर्ज नहीं हुई है। यहां सामान्य से 98 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

मौसम विभाग ने जताई राहत की उम्मीद

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इसके साथ ही मानसून प्रदेश के शेष जिलों में भी आगे बढ़ेगा, जिससे वर्षा की कमी धीरे-धीरे पूरी होने की उम्मीद है।रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। मंदसौर और रतलाम में तेज वर्षा हुई। इसके अलावा गुना, श्योपुर, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर, उज्जैन और छतरपुर समेत कई जिलों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई।

कई जिलों में बारिश की भारी कमी से बढ़ी चिंता

बैतूल में सामान्य से 42 प्रतिशत कम, अशोकनगर में 10 प्रतिशत कम, बड़वानी में 25 प्रतिशत कम, भिंड में 72 प्रतिशत कम, दतिया में 64 प्रतिशत कम, धार में 41 प्रतिशत कम, ग्वालियर में 35 प्रतिशत कम, हरदा में 34 प्रतिशत कम, झाबुआ में 63 प्रतिशत कम, खंडवा में 22 प्रतिशत कम, खरगौन में 19 प्रतिशत कम, मुरैना में 20 प्रतिशत कम, नर्मदापुरम में 30 प्रतिशत कम, रायसेन में 18 प्रतिशत कम तथा रतलाम में सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

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