नमामि गंगे मिशन के तहत, मध्यप्रदेश सरकार बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए व्यापक वैज्ञानिक योजना तैयार कर रही है।
भोपाल, रायसेन और विदिशा क्षेत्र के लिए बन रही परियोजना रिपोर्ट
मामि गंगे मिशन के तहत मध्यप्रदेश सरकार बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए व्यापक वैज्ञानिक योजना तैयार कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल नदी की सफाई नहीं, बल्कि सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण, नदी तंत्र का पुनर्स्थापन और पर्यावरणीय संतुलन कायम करना है। इसके लिए भोपाल, रायसेन और विदिशा में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
बेतवा के संरक्षण के लिए बनेगी वैज्ञानिक डीपीआर
नमामि गंगे मिशन के तहत बेतवा नदी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। भोपाल में नगरीय निकायों और संबंधित विभागों के इंजीनियरों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर नदी संरक्षण की वैज्ञानिक कार्ययोजना बनाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बेतवा का उद्गम रायसेन जिले के झिरी क्षेत्र से होता है, लेकिन भोपाल, रायसेन और विदिशा में नदी लगातार प्रदूषण की मार झेल रही है। भोजपुर के पास कलियासोत और बेतवा के संगम से लेकर मंडीदीप क्षेत्र तक नदी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
मध्यप्रदेश में स्वीकृत प्रमुख परियोजनाएं
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क्रम
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परियोजना
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स्वीकृत लागत (करोड़ रुपए)
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1
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ग्वालियर में मोरार नदी पुनर्जीवन एवं विकास
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39.24
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2
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मोरार रिवर फ्रंट विकास (फेज-2), ग्वालियर
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32.44
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3
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मंदसौर में शिवना नदी पर्यावरण उन्नयन
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28.91
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4
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चित्रकूट में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण
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31.88
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5
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इंदौर में कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण (एसटीपी)
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511.15
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6
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उज्जैन में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं एसटीपी
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101.57
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7
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नागदा में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं एसटीपी
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65.98
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8
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एमपीपीसीबी प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण
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13.40
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सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण रोकना सबसे बड़ी चुनौती
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य अनुपचारित सीवेज और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नदी में जाने से रोकना है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में अब तक प्रभावी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने के कारण औद्योगिक अपशिष्ट सीधे बेतवा में पहुंच रहा है। इसका असर नदी के जल, जैव विविधता और आसपास की कृषि भूमि पर भी पड़ रहा है। डीपीआर में सीवेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तटों का संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार, पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने और जनभागीदारी जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
824.57 करोड़ की आठ परियोजनाओं पर पहले से चल रहा काम
नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण में मध्यप्रदेश को 824.57 करोड़ रुपए की आठ परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन और नागदा में सीवेज प्रबंधन, ग्वालियर की मोरार नदी, मंदसौर की शिवना नदी, चित्रकूट की मंदाकिनी नदी तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं का खर्च केंद्र सरकार वहन कर रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक योजना, आधुनिक तकनीक और स्थानीय जनभागीदारी के जरिए बेतवा को फिर से स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाया जा सकेगा। इसके लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को डेटा संग्रह, विभागीय समन्वय और परियोजना क्रियान्वयन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।