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Bus Delivery Korba Story

चलती बस में गूंजी नवजात की किलकारी, यात्रियों ने कराया सुरक्षित प्रसव और जुटाए ₹9 हजार

कोरबा से पटना जा रही बस में जंगल के बीच गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई। यात्रियों और बस स्टाफ ने सुरक्षित प्रसव कराया और इलाज के लिए ₹9 हजार जुटाकर इंसानियत की मिसाल पेश की।


चलती बस में गूंजी नवजात की किलकारी यात्रियों ने कराया सुरक्षित प्रसव और जुटाए ₹9 हजार

Delivery In Moving Bus |

रायपुर। कोरबा से पटना जा रही एक यात्री बस सोमवार रात अचानक अस्पताल में बदल गई। घने जंगल, तेज बारिश और सीमित संसाधनों के बीच एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो बस में सवार यात्रियों ने हालात संभाल लिए। महिला यात्रियों और बस स्टाफ की मदद से सुरक्षित प्रसव कराया गया और कुछ ही देर बाद नवजात की पहली किलकारी पूरे वाहन में गूंज उठी।

यह भावुक घटना अंबिकापुर पार कर बलरामपुर की ओर जा रही राजहंस यात्री बस में हुई। कोरबा निवासी सुनती देवी अपने पति के साथ पहली संतान के जन्म से पहले ससुराल पटना जा रही थीं। रास्ते में अचानक दर्द बढ़ने पर बस को सड़क किनारे रोका गया और मौजूद लोगों ने बिना देर किए मदद शुरू कर दी।

संकट की घड़ी में यात्रियों ने संभाली जिम्मेदारी

रात करीब साढ़े 11 बजे शुरू हुई इस आपात स्थिति में बस में मौजूद महिला यात्रियों ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सुनीता बाई सहित अन्य महिलाओं और बस स्टाफ ने उपलब्ध संसाधनों के सहारे सुरक्षित प्रसव कराया। करीब आधे घंटे की कोशिश के बाद जब नवजात रोया तो बस में मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली।

इलाज के लिए यात्रियों ने जुटाए ₹9 हजार

प्रसव के बाद पता चला कि दंपति के पास अस्पताल और इलाज का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। यह सुनते ही बस में बैठे यात्रियों ने बिना किसी अपील के सहयोग शुरू कर दिया। किसी ने 100 रुपये दिए तो किसी ने 500 रुपये। देखते ही देखते 9 हजार रुपये इकट्ठा हो गए, जिन्हें परिवार को सौंप दिया गया।

अस्पताल पहुंचते ही मिली राहत

बलरामपुर पहुंचने के बाद प्रसूता और नवजात को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। फिलहाल दोनों चिकित्सकों की निगरानी में हैं और उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है।

मुश्किल हालात में इंसानियत की मिसाल

घने जंगल, तेज बारिश और रात के अंधेरे के बीच घटी यह घटना सिर्फ सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं है। यह उन अनजान लोगों की संवेदनशीलता का उदाहरण भी है, जिन्होंने संकट की घड़ी में एक परिवार का साथ दिया। यात्रियों की तत्परता और सहयोग ने साबित किया कि आपदा के समय इंसानियत सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।

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