भोपाल: देश के प्रख्यात कवि शशिकांत यादव का कहना है कि देश में बड़ा बदलाव आ रहा है। आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर परीक्षा से पहले बच्चों से बात करते हैं। 2014 से पहले प्रधानमंत्री 10 साल तक एक ही बच्चे से बात करते रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस काल में हास्य कवियों के देवता हैं। राहुल गांधी नहीं होते तो हास्य कविता विलुप्त सी हो जाती।
राष्ट्रवादी विचारों से जुड़े कवि शशिकांत यादव स्वदेश से विशेष बातचीत कर रहे थे। पूरी बातचीत में उनके निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे। उन्होंने कहा कि इस बार परीक्षा के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 लाख बच्चों से बात की लेकिन मोदी से पहले के प्रधानमंत्री दस साल एक ही बच्चे से बात करते रहे। जिसको यह नहीं पता आलू जमीन में लगता है या पेड़ पर। हम कवि हैं, हम सच लिखते हैं। किसी को आपत्ति है तो होती रहे। राहुल जी देश जोड़ने निकलें, आप बताइए देश कहां से टूटा है। राहुल जहां-जहां गए वहां तो देश जुड़ा हुआ है। उनके बाप दादा ने जहां देश तोड़ा वहां तो वे गए ही नहीं। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
आश्चर्य है- सरकार के बजाय विपक्ष पर कविताएं लिख रहे हैं कवि
प्रश्न: इस दौर में कवियों की समाज में कितनी बड़ी भूमिका है?
जवाब : हर दौर में कवि सच लिखता रहा है। कवि अलग दृष्टि से सरकारों को, व्यवस्था को अभिव्यक्त करता है, लेकिन इस समय जिस तरह का वातावरण है, मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि पिछले एक दशक से सरकार की बजाय विपक्ष के खिलाफ कविताएं लिखी जा रही हैं। राष्ट्रवाद की बात करो तो लोग कहते सरकारी कवि हो। कोई नेता अमेरिका में जाकर भारत की बुराई करेगा तो हम उसको छोड़ दें क्या? कोई इस देश में राष्ट्रवाद को चुनौती देगा तो हम उसकी तारीफ तो नहीं करेंगे ना! कोई इस देश में जाति के नाम पे विध्वंस खड़ा करने की कोशिश करेगा, इस देश को बांग्लदेश और नेपाल बनाना चाहेगा तो कविता तो लिखी जाएगी। 75 सालों में अब राष्ट्रभक्ति का रंग चढ़ा है।
प्रश्न : यादव और कवि इस बात पर आपको टारगेट किया जाता था ?
जवाब : संसार की पहली कविता गीता है, जिसे कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को सुनाया। कविता की भूमिका तो महाभारत काल से लेकर अब तक ईश्वर और इंसान के बीच की कड़ी के रूप में ही है। ईश्वर कभी हमको कुछ कहने हमारे कान में नहीं आए उन्होंने कविता को माध्यम बनाया।
राहुल में भाषायी संस्कार नहीं
38 सालों से कविता कर रहे शशिकांत यादव कहते हैं इंदिरा गांधी की हत्या ने मुझे इतना व्यथित किया था कि मैंने पहली कविता लिखी। इंदिरा जी के जीवन में अगर आपातकाल का कालंक नहीं होता तो इंदिरा जी सच में इस देश में पूजनीय होतीं। लेकिन उनका पोता राहुल गांधी आयु में इतने बड़े प्रधानमंत्री मोदी के बारे में तू-तड़ाग से बात करता है तो लगता है राजनीति में भाषाई संस्कार खत्म हो रहे हैं। अब कोई मर्यादा बची नहीं है।
आज बदल गया है जम्मू-कश्मीर का वातावरण
यादव बताते हैं मैं दस साल पहले जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय में कविता पढ़ने गया था तो मुझे कहा गया भारत माता की जय और वंदे मातरम् का जिक्र मत करना आप। बड़ी विडंबना है की भारत में रह के हम वंदे मातरम् न बोलें। अब समय बदला तो लाल चौक पर भी तिरंगा लहरा रहा है। हम कभी कल्पना कर सकते थे जम्मू कश्मीर में ऐसा वातावरण भी देखेंगे।
देश में आत्मसम्मान को जगाने का काम कर रहे हैं मोदी: कवि शशिकांत यादव प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं। वे कहते हैं- पहली बार देश को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है, जिसने जिस दिन से शपथ ग्रहण की तब से आज तक अपने काम से एक घंटे की छुट्टी नहीं ली। वे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो हर परीक्षा के पहले छोटे-छोटे बच्चों से बात करते हैं। वे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो खानदान को छोड़कर कभी भवरा में चंद्रशेखर आजाद को प्रणाम करने आते हैं, तो कभी कोलकाता में चंद्रशेखर आजाद के ड्राइवर के उम्रदराज मुस्लिम ड्राइवर के पैर पड़ने जाते हैं। मोदी देश में आत्मसम्मान को जगाने का काम कर रहे हैं।
राहुल का बुढ़ापा भी खराब होने वाला है: कवि यादव कहते हैं जो लोग
प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं मेरा उनसे साफ कहना है अभी तो मोदी जी हटेंगे नहीं, अगर हट गए तो मोटा भाई तैयार है। दस साल वो लेंगे कम से कम और वो हटेंगे तो बाबा जी बैठे गए हैं। अभी तो वेटिंग भी क्लियर नहीं होने वाली। बहुत लंबी लाइन है। समझ लीजिये राहुल गांधी जी की तो जवानी भी खराब है और बुढ़ापा भी खराब होने वाला है। मेरी सलाह है वे विवाह कर लें हो सकता पत्नी के भाग्य से राजनीति चल जाए ।