मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर की कार्यपरिषद में 6 नए सदस्यों का नामांकन किया है। यह नियुक्तियां 2026 से 2029 तक प्रभावी रहेंगी और विश्वविद्यालय प्रशासन को मजबूत करेंगी।
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर की कार्यपरिषद (Executive Council) में डीन कोटे से चार संकायाध्यक्षों को सदस्य नामित किया गया है। यह नियुक्ति मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 23 की उपधारा (1) के तहत की गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार विधि संकाय के डीन प्रो. गणेश दुबे, टेक्नोलॉजी संकाय के डीन प्रो. मनोज शर्मा, विज्ञान संकाय के डीन प्रो. एस.एन. महापात्रा तथा जीव विज्ञान संकाय के डीन प्रो. समीर भाग्यवंत को कार्यपरिषद का सदस्य बनाया गया है। यह नियुक्ति राज्यपाल सचिवालय से प्राप्त निर्देशों के आधार पर की गई है। कुलाधिपति द्वारा इन नामों को मंजूरी दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. राजीव मिश्रा ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।
राज्यपाल कोटे से भी हुई नियुक्तियां
राज्यपाल के उप-सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोकभवन भोपाल से प्राप्त पत्र के अनुसार विश्वविद्यालय कार्यपरिषद में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की भी नियुक्ति की गई है। जारी सूची में वरिष्ठ अधिवक्ता भानुप्रताप सिंह चौहान, समाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शर्मा और डॉ. ऋतु नामधारी को शामिल किया गया है। वहीं ग्वालियर के प्रतिष्ठित डॉक्टर डॉ. कुमार संजीव, सुश्री मनु चन्द्रभान सिंह एवं भोपाल से डॉ. रूप नारायण मांडवे को कार्यपरिषद सदस्य नामित किया गया है।
डॉ कुमार संजीव
डॉ कुमार संजीव मध्य भारत हिंदी साहित्य सभा के अध्यक्ष हैं। वे विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है और गजराराजा मेडिकल कॉलेज में पदस्थ हैं। ग्वालियर में अटल स्मृति भवन के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. ऋतु नामधारी
डॉ. ऋतु नामधारी वरिष्ठ चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. जे एस नामधारी की पत्नी हैं।
भानुप्रताप सिंह चौहान
भानुप्रताप सिंह चौहान एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में शासकीय अधिवक्ता हैं।
डॉ. मनु चन्द्रभान सिंह
इन सभी नियुक्तियों की अवधि 02 अप्रैल 2026 से 01 अप्रैल 2029 तक निर्धारित की गई है।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की स्थिति
अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के प्रावधानों के तहत लिया गया है और कुलाधिपति की स्वीकृति के बाद इसे प्रभावी किया गया है। इससे आगे कार्यपरिषद की संरचना पूरी होगी और प्रशासनिक निर्णयों में गति आने की उम्मीद है।