राजस्थान पुलिस ने 12.5 करोड़ के आईपीएल सट्टेबाजी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। नीमच के दो मास्टरमाइंड सहित 6 आरोपी गिरफ्तार हुए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और हाई-टेक सिस्टम से पूरे देश में सट्टा संचालित हो रहा
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस ने एक बड़े और संगठित ऑनलाइन आईपीएल सट्टा गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश के नीमच जिले के दो युवकों को मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस ने कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 12.5 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा किया है।
फार्म हाउस से चलता था पूरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार यह पूरा सट्टा नेटवर्क राजस्थान के प्रतापगढ़ में एक फार्म हाउस से संचालित किया जा रहा था। जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देश पर 8 अप्रैल को की गई छापेमारी में सभी आरोपी मौके से पकड़े गए। छापे के दौरान आरोपी लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों के जरिए सट्टेबाजी का संचालन करते पाए गए।
नीमच के दो आरोपी मास्टरमाइंड
गिरफ्तार आरोपियों में दो मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के नीमच जिले के निवासी हैं, जिन्हें इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया है। इनकी पहचान हर्षवर्धन अग्रवाल (27) निवासी जैन कॉलोनी नीमच और पुरुषोत्तम रेगर (24) निवासी सेमार्डा नीमच के रूप में हुई है। दोनों सीमावर्ती इलाकों का फायदा उठाकर राजस्थान से नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे। इसके अलावा अन्य आरोपियों में पंजाब, राजस्थान और बिहार के लोग भी शामिल हैं, जो इस अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा थे।
12.5 करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांजैक्शन उजागर
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 तक सक्रिय था। इस दौरान करीब 12 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक का अवैध ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किया गया। सिर्फ एक दिन यानी 8 अप्रैल को ही लाखों रुपये का लेन-देन हुआ था, जिससे नेटवर्क की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हाई-टेक सेटअप और डिजिटल सिस्टम
छापेमारी में पुलिस को एक मिनी कंट्रोल रूम जैसा सेटअप मिला। मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनमें शामिल हैं
- 6 लैपटॉप
- 38 मोबाइल फोन
- 48 सिम कार्ड
- CCTV कैमरा
- Wi-Fi डिवाइस
- ATM कार्ड और रजिस्टर
पुलिस के अनुसार यह पूरा सिस्टम पूरी तरह डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा था।
ऐसे चलता था ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Star66, Diamondexch, Lotus, 247 और Star-777 के जरिए ग्राहकों को जोड़ते थे। ग्राहकों को आईडी और पासवर्ड देकर पॉइंट्स के आधार पर सट्टा खिलाया जाता था। पूरा लेन-देन Telegram, WhatsApp और PhonePe जैसे ऐप्स के माध्यम से होता था, जिससे यह नेटवर्क काफी हद तक डिजिटल और ट्रैकिंग से बचा हुआ था।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
आरोपियों के खिलाफ BNS, IT एक्ट और आरपीजीओ एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित ठिकानों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है और आगे और बड़े खुलासे संभव हैं।