इंदौर एयरपोर्ट की रैंकिंग में बड़ा गिरावट, 6वें से 13वें नंबर पर पहुंचा। यात्रियों ने 31 में से 28 पैरामीटर्स पर असंतोष जताया, जिससे सुविधाओं और प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए।
इंदौरः मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब अपनी ही साख बचाने की जंग लड़ता नजर आ रहा है। कभी देश के टॉप एयरपोर्ट्स में गिने जाने वाला यह हवाई अड्डा अब रैंकिंग में तेजी से नीचे खिसक गया है।
साल 2026 की पहली तिमाही की रिपोर्ट में इंदौर एयरपोर्ट सीधे 6वें से 13वें स्थान पर पहुंच गया। यह गिरावट सिर्फ नंबर की नहीं, बल्कि यात्रियों के भरोसे में आई कमी का संकेत भी है। एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल की सर्विस क्वालिटी रिपोर्ट ने इस गिरावट को उजागर किया है, जिसमें यात्रियों ने सुविधाओं पर खुलकर नाराजगी जताई है।
यात्रियों की नाराजगी ने गिराया ग्राफ
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 में से 28 पैरामीटर्स पर यात्रियों ने कम अंक दिए। साफ-सफाई, वाईफाई कनेक्टिविटी और चार्जिंग पॉइंट्स जैसी बेसिक सुविधाएं भी उम्मीद पर खरी नहीं उतरीं। मनोरंजन के विकल्पों की कमी और खराब अनुभव ने यात्रियों को निराश किया। इसका सीधा असर रेटिंग पर पड़ा और स्कोर गिरकर 5 में से 4.87 रह गया।
नई सुविधाएं भी नहीं आई काम
एयरपोर्ट प्रबंधन ने हाल ही में उड़ान कैफे शुरू किया और वेटिंग एरिया बढ़ाया। लेकिन ये बदलाव यात्रियों को प्रभावित नहीं कर सके। स्वास्थ्य सुविधाएं, रेस्टोरेंट क्वालिटी और सुरक्षा जांच स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। यानी सुधार के प्रयास जमीन पर असर नहीं दिखा पाए।
छोटे शहरों से भी पीछे छूटा इंदौर
इस गिरावट का सबसे बड़ा झटका यह है कि इंदौर अब रायपुर, कालीकट, कोयंबत्तूर और भुवनेश्वर जैसे शहरों के एयरपोर्ट्स से भी पीछे हो गया है। यह स्थिति उस शहर के लिए चिंता का विषय है, जो खुद को तेजी से विकसित हो रहे मेट्रो के रूप में पेश करता रहा है। एयर कनेक्टिविटी और यात्री अनुभव अब इसकी छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
टॉप से नीचे तक का सफर
साल 2025 में इंदौर एयरपोर्ट देश में तीसरे स्थान पर था। तब इसे 4.92 अंक मिले थे और उम्मीद थी कि यह जल्द नंबर-1 बन सकता है। लेकिन 2026 की शुरुआत ने ही तस्वीर बदल दी। अब 16 प्रमुख एयरपोर्ट्स की सूची में इंदौर से पीछे सिर्फ श्रीनगर, पोर्ट ब्लेयर और अमृतसर बचे हैं। उधर पुणे एयरपोर्ट, चेन्नई एयरपोर्ट और गोवा एयरपोर्ट जैसे एयरपोर्ट्स टॉप पर हैं, जिन्होंने सर्विस क्वालिटी में लगातार सुधार दिखाया है।
आगे क्या असर पड़ेगा?
इस रिपोर्ट का असर आने वाली तिमाहियों की रैंकिंग पर भी पड़ेगा। अगर सुधार नहीं हुआ तो इंदौर की अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ा नुकसान हो सकता है। यात्रियों का अनुभव अब सिर्फ सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर की ब्रांड वैल्यू से जुड़ा सवाल बन चुका है।