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Digvijaya Singh Faces Congress Fire

कांग्रेस महासचिव का दिग्विजय सिंह पर बड़ा हमला, कहा- 'पुत्र मोह में पार्टी को पहुंचा रहे नुकसान'

उज्जैन भूमि आवंटन विवाद के बीच कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर पार्टी अनुशासन तोड़ने, 'पुत्र मोह' में फैसले लेने और हाईकमान


कांग्रेस महासचिव का दिग्विजय सिंह पर बड़ा हमला कहा- पुत्र मोह में पार्टी को पहुंचा रहे नुकसान

MP Congress Politics News |

भोपाल। उज्जैन में एक रुपये में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन आवंटित किए जाने के आरोपों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों से अलग रुख अपनाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं।

कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर दिग्विजय सिंह के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे केवल मतभेद नहीं, बल्कि संगठन और पार्टी अनुशासन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से कार्रवाई की मांग भी की है।

पार्टी अनुशासन पर उठे सवाल

निधि चतुर्वेदी ने कहा कि उज्जैन भूमि विवाद की सच्चाई जांच का विषय हो सकती है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के बयान का सार्वजनिक मंच से खंडन करना किसी वरिष्ठ नेता के लिए उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि दिग्विजय सिंह को जीतू पटवारी के आरोपों पर आपत्ति थी तो वह पार्टी के अंदरूनी मंचों पर अपनी बात रख सकते थे। मीडिया के सामने अलग रुख अपनाने से संगठन की छवि प्रभावित होती है।

'पुत्र मोह' का आरोप और हाईकमान से मांग

अपनी पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा में फैसले ले रहे हैं। उन्होंने इसे 'पुत्र मोह' बताया और कहा कि इस वजह से पार्टी अनुशासन कमजोर हो रहा है। पोस्ट के अंत में उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की।

बीजेपी को फायदा पहुंचाने का दावा

निधि ने लिखा कि जब राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं, तब पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कमजोर करना विपक्ष को राजनीतिक बढ़त देने जैसा है। उनके मुताबिक इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित होता है। उन्होंने 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने, 2023 और 2024 के चुनावी नतीजों तथा हालिया राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने संगठन को नुकसान पहुंचाया है।

उज्जैन भूमि विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला

विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये में आवंटित की गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जमीन आवंटन में अनियमितता के दावे से खुद को अलग बताया। इसी के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। इस बीच प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने भी कांग्रेस की अंदरूनी बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि पार्टी के नेता ही ऐसे आरोप लगा रहे हैं तो कांग्रेस को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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