मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के प्रति सहानुभूति जताते हुए अपने राजनीतिक दर्द को व्यक्त किया।
मध्यप्रदेश की राजनीति के विवादास्पद नेताओं में शुमार दिग्विजय सिंह की एक्स हैंडल पर लिखी एक पोस्ट ने प्रदेश के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के प्रति कथित सहानुभूति जताते हुए की गई उनकी टिप्पणी को राजनीतिक जानकार केवल एक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक पीड़ा के रूप में भी देख रहे हैं।
पिछले कुछ समय से कांग्रेस के भीतर कनिष्ठ नेताओं के कटाक्ष और 'स्लीपर सेल' जैसे आरोपों का सामना कर रहे दिग्विजय सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "कैलाश विजयवर्गीय, आपका दर्द और पीड़ा मैं समझ रहा हूं। जो... आपके चरण छूता था, वह आज आपके साथ यह व्यवहार कर रहा है। समय का फेर है। मेरी सहानुभूति आपके साथ है। जय सियाराम।"
दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय के बहाने उन्होंने कांग्रेस में अपनी घटती अहमियत को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, उससे यह ध्वनित होता है कि वे इन दिनों अपनी ही पार्टी में उपेक्षा और अपमान की टीस महसूस कर रहे हैं।
मंगलवार को कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की बैठक में पार्टी के कई नेताओं ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। इसी बीच भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमंत्री को लिखे एक कथित पत्र की भी चर्चा सामने आई, जिसमें बताया गया कि उन्होंने पार्टी से जुड़े कुछ मुद्दों पर अपनी राय रखी है। हालांकि, इस तरह के किसी पत्र की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
एक दौर में बोलती थी तूती, अब हाशिये पर
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में "समय का फेर" शब्दों का इस्तेमाल किया है। सियासी जानकारों का कहना है कि यह वाक्यांश स्वयं उन पर भी सटीक बैठता है। एक समय ऐसा था जब मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में भी दिग्विजय सिंह का खास प्रभाव था और उनके बयानों का विशेष महत्व माना जाता था।
अब स्थिति यह है कि उन्हें कई बार अपने बयान वापस लेने पड़े हैं। पार्टी की बैठकों में आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस बार उन्हें राज्यसभा की उम्मीदवारी भी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधा। पार्टी आलाकमान ने उन्हें फटकार लगाई और बाद में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करनी पड़ी।
कैलाश विजयवर्गीय का बयान
दोपहर में: इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, "मुझे किसी पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैंने भी केवल खबर पढ़ी है।"शाम को 'स्वदेश' से: उन्होंने कहा, "मुझे इस पूरे मसले में कुछ नहीं कहना है। कोई टिप्पणी नहीं करना है।"
दिग्विजय ने पुत्र मोह में दिया बयान: निधि चतुर्वेदी
सागर। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने भी मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर दिग्विजय सिंह ने जो कुछ कहा, वह समझ से परे है। उनका आरोप है कि यह सब दिग्विजय सिंह ने पुत्र मोह में किया। उन्होंने कहा, "अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो एक मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह उन्हें आमने-सामने बैठकर या फोन पर अपनी बात बता सकते थे। उनके पास पार्टी के तमाम आंतरिक मंच उपलब्ध थे, जहां वे अपनी बात रख सकते थे।"