धार भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में लंबी सुनवाई पूरी हुई। ASI समेत सभी पक्षों ने दलीलें रखीं, अब कोर्ट के फैसले पर सबकी नजर है।
इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बेंच में मंगलवार को बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले की अहम सुनवाई पूरी हो गई। करीब दो घंटे से ज्यादा चली बहस के दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से कोर्ट के सामने रखे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी अपनी रिपोर्ट और पक्ष को मजबूती से रखा। फिलहाल हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
धार की भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। ऐसे में इस मामले की हर सुनवाई पर सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर की नजर बनी रहती है। अब सवाल यही उठ रहा है कि कोर्ट का अगला फैसला इस विवाद की दिशा कितनी बदल सकता है।
सुनवाई में किन मुद्दों पर हुई सबसे ज्यादा बहस?
मंगलवार को हुई सुनवाई में भोजशाला परिसर की ऐतिहासिक प्रकृति, ASI सर्वे रिपोर्ट और धार्मिक दावों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे अदालत के सामने रखे। दरअसल, यह मामला सिर्फ धार्मिक अधिकारों तक सीमित नहीं है। इसमें ऐतिहासिक संरचना, पुरातात्विक साक्ष्य और पूजा-अधिकार जैसे कई संवेदनशील मुद्दे जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि अदालत भी हर पक्ष को विस्तार से सुन रही है। ASI की ओर से कोर्ट में यह बताया गया कि सर्वे के दौरान मिले कई अवशेष और संरचनाएं महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष कोर्ट के आदेश के बाद ही साफ हो पाएगा।
आखिर भोजशाला विवाद इतना अहम क्यों माना जाता है?
धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्षों से यहां पूजा और नमाज को लेकर विवाद चलता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में ASI सर्वे के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आया। सर्वे में मिले तथ्यों को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला आने वाले समय में काफी अहम माना जा रहा है। यही कारण है कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक इस मामले की लगातार चर्चा हो रही है।
कोर्ट के आदेश सुरक्षित रखने का क्या मतलब है?
जब अदालत किसी मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुन लेती है और तुरंत फैसला नहीं सुनाती, तब आदेश सुरक्षित रखा जाता है। अब हाईकोर्ट तय करेगा कि इस मामले में आगे क्या निर्देश दिए जाएं। कानूनी जानकारों की मानें तो कोर्ट का फैसला सिर्फ भोजशाला विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे दूसरे मामलों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।