धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद एएसआई ने नया आदेश जारी किया। अब भोजशाला में 365 दिन पूजा की अनुमति मिलेगी, मस्जिद शब्द हटाया गया।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले के बाद धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नया आदेश जारी करते हुए भोजशाला के आधिकारिक रिकॉर्ड और शीर्षक से ‘कमाल मौला मस्जिद’ शब्द हटा दिया है। अब इस स्थल को केवल ‘राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला तथा संस्कृत पाठशाला’ के रूप में संबोधित किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत एएसआई ने भोजशाला में हिंदू श्रद्धालुओं को वर्ष के सभी 365 दिनों तक पूजा-अर्चना की अनुमति देने का निर्णय भी लागू कर दिया है। फैसले के बाद धार सहित पूरे मालवा क्षेत्र में इसे ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला रिकॉर्ड
इंदौर खंडपीठ ने अपने निर्णय में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप और वहां लंबे समय से चली आ रही पूजा परंपरा को महत्व दिया था। अदालत ने भोजशाला को मां वाग्देवी सरस्वती मंदिर मानने संबंधी टिप्पणियों के बाद एएसआई ने भी रिकॉर्ड में संशोधन कर दिया।अब तक एएसआई के दस्तावेजों में भोजशाला के साथ ‘कमाल मौला मस्जिद’ का उल्लेख किया जाता था, लेकिन नए आदेश में इस हिस्से को हटा दिया गया है। इससे परिसर की आधिकारिक पहचान केवल भोजशाला के रूप में स्थापित हुई है।
अब पूरे साल होगी पूजा-अर्चना
नई व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालु अब बिना किसी विशेष प्रतिबंध के पूरे वर्ष भोजशाला में पूजा कर सकेंगे। इससे पहले पूजा और नमाज को लेकर अलग-अलग दिनों की व्यवस्था लागू रहती थी। एएसआई के आदेश के बाद श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखा गया। शनिवार सुबह बड़ी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे और मां वाग्देवी के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना की।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, हिंदू पक्ष ने दाखिल की कैविएट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हिंदू पक्ष ने उच्चतम न्यायालय में कैविएट भी दाखिल कर दी है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से 15 मई को यह कैविएट दायर की गई।एडवोकेट विनय जोशी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। खास बात यह रही कि हाईकोर्ट के फैसले के 24 घंटे के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी गई।
तैलचित्र को लेकर परिसर में बनी संवेदनशील स्थिति
शनिवार को भोजशाला परिसर में उस समय संवेदनशील माहौल बन गया जब कुछ श्रद्धालु अखंड ज्योति मंदिर से मां वाग्देवी और हनुमान जी का तैलचित्र लेकर पहुंचे। महिलाओं ने चित्रों को गर्भगृह में स्थापित करने की इच्छा जताई।हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस और एएसआई अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। अधिकारियों ने कहा कि आगामी प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं को समझाइश देकर शांत कराया गया।
‘मैं घोर सनातनी हूं’- दिग्विजय सिंह
भोजशाला मामले में फैसला आने के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान भी चर्चा में रहा। इंदौर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि वह “घोर सनातन धर्म को मानने वाले” हैं।इस दौरान विधायक उषा ठाकुर से उनकी चर्चा भी हुई। ठाकुर ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करते। इस पर दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि वह “घोर सनातनी” हैं।
भोजशाला परिसर में गूंजी हनुमान चालीसा
शनिवार सुबह भोजशाला परिसर का वातावरण श्रद्धा और उत्साह से भरा नजर आया। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी के स्थान पर पुष्प अर्पित किए और यज्ञकुंड के पास पूजा-अर्चना की।परिसर में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें बिना रोक-टोक दर्शन और पूजा का अवसर मिला है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरा परिसर धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।