छत्तीसगढ़ में मूकबधिर युवती ने गुड़िया के जरिए कोर्ट में रेप की कहानी बताई। हाईकोर्ट ने इशारों की गवाही को मान्य मानते हुए आरोपी को उम्रकैद दी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां बोल और सुन नहीं सकने वाली एक युवती ने अपने साथ हुए दुष्कर्म की पूरी कहानी अदालत में इशारों से बयां की। अदालत ने इस गवाही को न सिर्फ गंभीरता से लिया, बल्कि इसे पूरी तरह भरोसेमंद मानते हुए आरोपी रिश्तेदार को उम्रकैद की सजा सुनाई।
यह मामला साल 2020 का है। घटना बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का बताया जा रही है। घटना के दिन युवती घर में अकेली थी। उसके माता-पिता खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान आरोपी रिश्तेदार घर में घुस आया और उसने युवती के साथ दुष्कर्म किया। फिर मौके से फरार हो गया।
बेटी ने रोते हुए बताई दास्तां
शाम को जब मां घर लौटी तो बेटी को रोते हुए पाया। युवती ने इशारों के जरिए पूरी घटना बताई और आरोपी की पहचान भी कराई। इसके बाद परिवार ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 450 और 376(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
गवाही दर्ज कराना बड़ी चुनौती
मामले की सुनवाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सामने आई। जो थी पीड़िता की गवाही को अदालत में दर्ज कराना। क्योंकि वह जन्म से ही बोल और सुन नहीं सकती थी। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली। जब कुछ बातें स्पष्ट करने में कठिनाई हुई तो अदालत ने एक प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई।
गुड़िया के सहारे बताई दरिंदगी की दास्तां
युवती ने उसी गुड़िया के सहारे इशारों में बताया कि उसके साथ क्या हुआ था। यह दृश्य कोर्ट के लिए भी बेहद गंभीर और संवेदनशील रहा। अदालत ने इस तरीके से दी गई गवाही को रिकॉर्ड किया और इसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
ट्रायल कोर्ट ने इसी आधार पर आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
कोर्ट ने क्या तर्क दिया
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि केवल इस आधार पर किसी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि वह मूक-बधिर है। इशारों के जरिए दी गई जानकारी भी कानूनन मौखिक साक्ष्य मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी माना कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह सुसंगत और विश्वसनीय है।
इसके अलावा मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी अपराध की पुष्टि की। जांच में पीड़िता के सैंपल और आरोपी के कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए गए थे। इसका कोई संतोषजनक जवाब आरोपी नहीं दे सका। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा के तहत 'मृत्यु तक उम्रकैद' और 5 साल की सजा सुनाई। साथ ही 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। आरोपी फिलहाल जेल में है और उसे पूरी सजा काटनी होगी।