दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। समीक्षा समिति की अनुशंसा पर दतिया जिला भाजपा की पूरी संगठनात्मक संरचना तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई।
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर हुई समीक्षा बैठक के बाद प्रदेश संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दतिया जिला भाजपा की पूरी संगठनात्मक संरचना तत्काल प्रभाव से भंग कर दी है। यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर की गई है।
प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर दतिया जिले की वर्तमान संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
जिलाध्यक्ष से लेकर मंडल स्तर तक सभी पदमुक्त
आदेश के मुताबिक जिला अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों सहित पूरे जिला संगठन की सभी वर्तमान इकाइयों को पदमुक्त कर दिया गया है। अब प्रदेश नेतृत्व जल्द ही नई संगठनात्मक टीम के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगा।
हार के बाद शुरू हुई थी समीक्षा
दतिया उपचुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर वरिष्ठ नेताओं की बैठक में हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा हुई। संगठन की भूमिका, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

भीतरघात और संगठन की निष्क्रियता पर फोकस
पार्टी सूत्रों के अनुसार, समीक्षा के दौरान चुनाव में अपेक्षित संगठनात्मक सक्रियता नहीं मिलने और कुछ पदाधिकारियों पर प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत से काम नहीं करने की शिकायतें सामने आई थीं। टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष और चुनाव प्रचार के दौरान संगठन की कार्यशैली भी समीक्षा का हिस्सा रही।
आशुतोष तिवारी ने दिए भीतरघात के सबूत
जानकारी के अनुसार, बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पार्टी को भीतरघात के सबूत भी सौंपे थे। दिल्ली को आज समीक्षा की विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी गई थी। इसके बाद हार की समीक्षा के लिए दो सदस्य समिति का गठन किया गया था। भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और अंबाराम कराड़ा ने हार की समीक्षा की।
आगे और जिलों में भी हो सकती है कार्रवाई
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया में हुई कार्रवाई केवल एक जिले तक सीमित नहीं रह सकती। प्रदेश नेतृत्व अन्य जिलों की संगठनात्मक कार्यप्रणाली की भी समीक्षा कर रहा है। जिन जिलों में संगठन पर गुटबाजी, अनुशासनहीनता या व्यक्तिगत प्रभाव की शिकायतें हैं, वहां भी आने वाले दिनों में फेरबदल संभव माना जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व का संकेत है कि भविष्य में संगठनात्मक अनुशासन, जवाबदेही और चुनावी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी आधार पर नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जा सके।