दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे। राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद खाली सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला तय है।
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। इसके साथ ही निर्वाचन प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी होगी और दतिया क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
यह सीट उस वक्त खाली हुई जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता अदालत से दोषसिद्धि के बाद समाप्त कर दी गई। बैंक एफडी से जुड़े 28 साल पुराने मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 3 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई।
कानूनी फैसले से खाली हुई सीट
साल 1998 के सहकारी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट मामले में हेरफेर के आरोपों में लंबे समय से चल रही जांच के बाद 1 अप्रैल 2026 को विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था। इसके बाद 2 अप्रैल को उन्हें सजा सुनाई गई और उसी दिन विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर सीट रिक्त घोषित कर दी। सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत यह कार्रवाई स्वतः प्रभावी मानी गई।
बीजेपी और कांग्रेस की सियासी टक्कर
उपचुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि पार्टी यह सीट आसानी से जीत लेगी, हालांकि उम्मीदवार को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वहीं कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि यह सीट राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से छीनी गई है और जनता एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा जताएगी।
दावेदारी और चुनावी रणनीति पर नजर
बीजेपी की ओर से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है, जो लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान सामने आ रही है, जहां पूर्व विधायक के परिवार से लेकर अन्य दावेदार भी अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव की मौजूदगी से मुकाबला त्रिकोणीय होने के संकेत मिल रहे हैं।
स्थानीय मुद्दे और वोट समीकरण की भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक इस उपचुनाव में जातीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण वोट बैंक चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। पिछले चुनाव के आंकड़े और स्थानीय असंतोष दोनों ही इस बार चुनावी दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।