दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई। 50 हजार के निजी बॉन्ड पर जमानत मिली, 60 दिन में अपील का मौका।
कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उनके सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी इतनी ही सजा सुनाई है।
सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने दोनों दोषियों को 50 हजार रुपए के निजी बॉन्ड पर जमानत दे दी है। उन्हें उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया है। इस तरह मध्य प्रदेश के विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के बाद अब राजेंद्र भारती की विधायकी पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय से कुछ समय के लिए राहत मिल चुकी है।
एक दिन पहले न्यायालय ने माना था दोषी
धोखाधड़ी के मामले में एक दिन पहले ही न्यायालय ने राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत आपराधिक साजिश रचने और धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों का दोषी पाया गया है।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इसकी सुनवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। दरअसल, राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।
अपील के लिए 60 दिन
राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। शिकायतकर्ता के वकील अनिल शुक्ला के अनुसार, अपील के लिए श्री भारती को 60 दिन का समय मिलेगा। इस समयावधि में स्थगन नहीं मिला तो उनकी विधायक सदस्यता समाप्त हो सकती है। फिलहाल उनकी सदस्यता पर संकट बना हुआ है।
यह है मामला
राजेंद्र भारती ने वर्ष 1998 की एफडी में कूटरचना कर उसकी अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी और 13.5 प्रतिशत ब्याज दर पर वर्षों तक राशि निकाली। 3 मार्च 2011 को बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी की शिकायत पर सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे ने जांच की थी। जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था।