लगता है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गेहूं उत्पादन के सिस्टम को पूरी तरह से ठीक करने का मन बना लिया है
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर लगातार एक्टिव नजर आ रहे हैं। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वह कभी भी किसी भी उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। इसके अगले ही दिन उन्होंने अपने बयान को जमीन पर उतारते हुए पहले खरगोन और फिर शाजापुर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
शाजापुर में मुख्यमंत्री का अलग अंदाज देखने को मिला। यहां वह सीधे किसान की ट्रॉली पर चढ़ गए और गेहूं की गुणवत्ता जांची। इसके बाद उन्होंने वेयरहाउस पहुंचकर तौल और अन्य व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। इस दौरान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
शाजापुर में किसान की ट्रॉली पर चढ़े सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाजापुर जिले के मकोड़ी स्थित श्यामा वेयरहाउस पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत की और उपार्जन प्रक्रिया को लेकर जानकारी ली।

दरअसल, निरीक्षण के दौरान सीएम खुद किसान की ट्रॉली पर चढ़ गए और गेहूं की क्वालिटी को करीब से देखा। उन्होंने गेहूं का वजन भी तुलवाकर जांच की। उनका यह अंदाज वहां मौजूद किसानों और अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
खरगोन में भी अचानक पहुंचे थे मुख्यमंत्री
शाजापुर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री सुबह अचानक खरगोन जिले के कतरगांव उपार्जन केंद्र पहुंचे थे। यहां उन्होंने गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज का सम्मानपूर्वक और समय पर खरीदी होना सरकार की प्राथमिकता है।
उपार्जन केंद्रों पर 6 तौल कांटे लगाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर और मंडी सचिव को निर्देश दिए कि सभी खरीदी केंद्रों पर छह तौल कांटे लगातार चालू रहें ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने कहा कि
- पर्याप्त बारदाना उपलब्ध रहे
- तौल कांटे लगातार चालू रहें
- सिलाई मशीन और कंप्यूटर उपलब्ध हों
- स्लॉट बुकिंग के लिए नेट कनेक्शन सही रहे
- किसानों के लिए पेयजल और छाया की व्यवस्था हो
सीएम ने यह भी कहा कि गेहूं खरीदी के नए मापदंड तुरंत लागू किए जाएं।
किसानों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने उपार्जन केंद्रों पर टेंट, बैठने की व्यवस्था और शीतल पेयजल की उपलब्धता भी जांची।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गर्मी को देखते हुए किसानों के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएं ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।

अब समझिए… सरकार इस बार गेहूं खरीदी व्यवस्था में लापरवाही को लेकर काफी सख्त दिखाई दे रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री खुद मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इतना साफ है कि मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं उपार्जन व्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर दिखाई दे रही है।