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CG Schools Caste Certificate Task

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों पर बढ़ा नया जिम्मा, पहली के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र पहले बनेंगे या पढ़ाई?

छत्तीसगढ़ में एक जुलाई से नियमित पढ़ाई शुरू होने से पहले शिक्षकों को पहली कक्षा के नवप्रवेशी बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने की जिम्मेदारी दी गई है। जानिए इससे पढ़ाई और स्कूल व्यवस्था पर क्या असर पड


छत्तीसगढ़ के शिक्षकों पर बढ़ा नया जिम्मा पहली के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र पहले बनेंगे या पढ़ाई

Chhattisgarh News |

रायपुर। एक जुलाई से छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नियमित कक्षाएं शुरू होनी हैं। लेकिन उससे पहले शिक्षकों के सामने एक नया प्रशासनिक दायित्व आ गया है। नवप्रवेशी और पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में अब शिक्षकों की सक्रिय भूमिका तय की गई है।

जगदलपुर में हुई समीक्षा बैठक के बाद जिला प्रशासन ने इस काम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को भविष्य की शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा, जबकि शिक्षक इसे पढ़ाई की शुरुआत के दौरान अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं।

शिक्षकों की जिम्मेदारी क्यों बढ़ी

जिला प्रशासन ने स्कूलवार, कक्षावार और श्रेणीवार सूची तैयार कर पहली कक्षा के विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा, जो दस्तावेजों के सत्यापन और समन्वय का काम संभालेगा। यह व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से लागू है, लेकिन नए सत्र की शुरुआत के साथ फिर चर्चा में आ गई है।

पढ़ाई पर असर की आशंका

शिक्षकों का कहना है कि एक बच्चे का जाति प्रमाण पत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 दिन तक लग सकते हैं। इस दौरान दस्तावेज जुटाने, अभिभावकों से समन्वय और प्रशासनिक औपचारिकताओं में काफी समय देना पड़ता है। ऐसे में नियमित कक्षाओं के शुरुआती दिनों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

एकल शिक्षक स्कूलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

जिले की करीब 300 एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाओं में स्थिति और कठिन मानी जा रही है। यहां एक ही शिक्षक को पांच कक्षाओं की पढ़ाई, स्कूल संचालन, डिजिटल एप पर दैनिक रिपोर्टिंग और अब जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी संभालनी होगी। ऐसे स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन सकता है।

कलेक्टर ने तय की निगरानी व्यवस्था

कलेक्टर आकाश छिकारा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्कूल जतन योजना, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों, शिक्षा और खेल गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाए। प्रत्येक स्कूल के लिए जिला स्तर का एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा, जो हर महीने एक शनिवार को विद्यालय का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का आकलन करेगा।

अन्य विभागों को भी दिए गए निर्देश

समय-सीमा की बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को फील्ड विजिट बढ़ाने के निर्देश दिए गए। राशन कार्ड की ई-केवाईसी 15 जुलाई तक पूरी करने, ऑफलाइन राशन दुकानों को ऑनलाइन करने और बारिश के मौसम में संभावित बीमारियों से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। साथ ही बैठक में देरी से पहुंचने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने की बात भी कही गई।

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