छत्तीसगढ़ में सरेंडर कर चुके नक्सली अब सुरक्षा बलों को IED से निपटने की ट्रेनिंग देंगे। बस्तर में सुरक्षा मजबूत करने और जवानों की क्षमता बढ़ाने की नई पहल शुरू।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब सरेंडर कर चुके नक्सली सुरक्षा बलों को इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से निपटने की ट्रेनिंग देंगे। इसका उद्देश्य जवानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना है।
क्या है नई पहल
दरअसल, बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद पुलिस ने यह रणनीति अपनाई है। अधिकारियों का मानना है कि पूर्व नक्सलियों के पास आईईडी बनाने और इस्तेमाल करने का व्यावहारिक अनुभव है। यह अब सुरक्षा बलों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
कहां दी जाएगी ट्रेनिंग
बस्तर रेंज के आईजी के अनुसार, कांकेर स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर कॉलेज में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए करीब 20 पूर्व माओवादी कैडर की पहचान की गई है। यह पहले आईईडी ऑपरेशन में सक्रिय रहे हैं।
कैसे मदद करेंगे पूर्व नक्सली
प्रशिक्षण के दौरान ये पूर्व नक्सली जवानों को बताएंगे कि आईईडी कैसे तैयार किए जाते हैं। जंगलों में इन्हें कहां और कैसे छिपाया जाता है। इसके साथ ही इनको किस तरह इन्हें ट्रिगर किया जाता है। इससे सुरक्षा बलों को जमीनी स्तर पर बेहतर समझ मिलेगी और ऑपरेशन के दौरान जोखिम कम होगा।
आईईडी क्यों है बड़ा खतरा
बस्तर क्षेत्र में IED लंबे समय से सुरक्षा बलों और आम लोगों के लिए बड़ा खतरा रहा है। इन्हें अक्सर जमीन के नीचे या घने जंगलों में छिपाकर लगाया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 से मार्च 2026 तक बस्तर संभाग के सात जिलों में 4607 IED बरामद किए गए। इसके साथ ही 1280 विस्फोट की घटनाएं दर्ज हुईं। इन घटनाओं में कई बार जवानों और नागरिकों को नुकसान हुआ है।
सुरक्षा के साथ पुनर्वास पर फोकस
यह पहल सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है। प्रशासन सरेंडर कर चुके नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से न केवल सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ेगी। बल्कि क्षेत्र में छिपे पुराने IED को खोजने और निष्क्रिय करने में भी मदद मिलेगी।