छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल और कवासी लखमा कोर्ट में पेश, 59 नए आरोपी शामिल, जानें पूरा केस।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आज की सुनवाई ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया। पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे से लेकर पूर्व मंत्री तक कई बड़े नाम एक साथ अदालत पहुंचे। ED की स्पेशल कोर्ट में हुई इस पेशी ने साफ कर दिया कि जांच अब काफी व्यापक दायरे में पहुंच चुकी है।
कोर्ट में एक साथ कई बड़े चेहरे
आज ED की स्पेशल कोर्ट में चैतन्य बघेल और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पेश हुए। इनके साथ 59 नए आरोपियों को भी अदालत में पेश किया गया, जिनमें 28 आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए। खास बात यह रही कि इतने बड़े संख्या में आरोपियों की एक साथ पेशी ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
23 से बढ़कर 82 आरोपी
एडवोकेट फैजल रिजवी के मुताबिक, ईडी पहले ही इस मामले में अभियोग पत्र दाखिल कर चुकी है। शुरुआत में जहां 23 आरोपी थे, अब यह संख्या बढ़कर 82 हो चुकी है। जांच के दौरान अधिकांश आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि बिना गिरफ्तारी के ही चार्जशीट पेश की गई। कई आरोपियों ने धारा 88 के तहत कोर्ट में आवेदन भी दिया है।
शराब कंपनियों पर EOW का शिकंजा
हाल ही में ईओडब्ल्यू ने दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके ट्रक जब्त किए थे। इसी केस में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय ‘राजीव भवन’ से जुड़े एक अकाउंटेंट समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उनसे कई घंटों तक पूछताछ चली।
कोषाध्यक्ष अब भी फरार
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल अब भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं। ईडी और EOW दोनों ही एजेंसियां उनकी भूमिका को लेकर जांच कर रही हैं और उनसे जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। इस पूरे मामले की जांच ईडी कर रही है। इसकी एफआईआर ACB में दर्ज कराई गई थी। इसके अनुसार, घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है।
जांच में सामने आया कि कथित तौर पर एक सिंडिकेट के जरिए इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। इसमें अफसर, कारोबारी और राजनीतिक कनेक्शन की बात सामने आई है।
कैसे हुआ घोटाला? तीन हिस्सों में समझिए
A कैटेगरी में डिस्टलरी से कमीशन
डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन लिया गया। इस नुकसान की भरपाई के लिए शराब की कीमतें बढ़ाई गईं और ओवर बिलिंग की छूट दी गई। फिर B कैटेगरी में नकली होलोग्राम का खेल किया गया। असली से ज्यादा शराब बनवाकर नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों में बेची गई। इस पूरे नेटवर्क में सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आई। करीब 40 लाख पेटी शराब इस तरीके से बेचे जाने के साक्ष्य जांच एजेंसियों को मिले हैं।
C कैटेगरी में सप्लाई जोन में हेरफेर
डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को बदलकर अवैध वसूली की गई। तीन साल में इस तरीके से करीब 52 करोड़ रुपए वसूले जाने के सबूत मिले हैं।