छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहमति से संबंध को रेप नहीं माना और 4 साल पुराने केस में आरोपी को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया गया।
बिलासपुर। एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। उन्होंने कहा ‘शादीशुदा महिला की मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते।’ यही टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने एक अहम फैसले में आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया। दरअसल, करीब 4 साल पुराने इस मामले में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और पीड़िता की याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला साल 2022 का है। जब बेमेतरा जिले की रहने वाली एक शादीशुदा महिला ने एक युवक पर रेप का आरोप लगाया था। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी करने जाती थी। जहां आरोपी से उसकी पहचान हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने शादी का वादा कर उसे अपने झांसे में लिया और शारीरिक संबंध बनाए।
प्रेग्नेंसी और बाद में दर्ज हुई शिकायत
महिला ने यह भी बताया कि 25 जुलाई 2022 को सुबह करीब 4 बजे आरोपी ने उसे अपने घर ले जाकर संबंध बनाए। उस समय वह करीब तीन महीने की गर्भवती थी। सामाजिक बदनामी के डर से उसने तुरंत शिकायत नहीं की। लेकिन बाद में पति को पूरी बात बताने के बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
ट्रायल कोर्ट ने पहले ही किया था बरी
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को पहले ही बरी कर दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आरोपी द्वारा जबरदस्ती या धमकी देने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। साथ ही ऐसा भी प्रमाण नहीं मिला कि महिला को शादी का कानूनी भ्रम था। पीड़िता अपनी सहमति देने की स्थिति में थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि महिला नशे में थी या मानसिक रूप से अस्थिर थी।
अंत में कोर्ट ने साफ कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से बनाए गए संबंध रेप नहीं माने जा सकते।