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चंदेरी आकर्षित करता विदेशी पर्यटकों को

सात समंदर पार बिखरी चंदेरी के सुकून की महक: 'मध्य स्वदेश' अखबार को यादों के रूप में साथ ले गए विदेशी

चंदेरी का ऐतिहासिक विरासत और शांत वातावरण ने विदेशी पर्यटकों को बेहद प्रभावित किया। 'मध्य स्वदेश' अखबार उनके लिए यादगार दस्तावेज बना।


सात समंदर पार बिखरी चंदेरी के सुकून की महक मध्य स्वदेश अखबार को यादों के रूप में साथ ले गए विदेशी

ऐतिहासिक धरोहरों और बेजोड़ स्थापत्य कला की नगरी चंदेरी की खूबसूरती और शांत वातावरण ने एक बार फिर विदेशी पर्यटकों का दिल जीत लिया है।

दिल्ली और आगरा जैसे देश के बड़े एवं व्यस्त पर्यटन केंद्रों का दीदार करने के बाद अमेरिका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से आए पर्यटकों का एक संयुक्त दल दो दिवसीय यात्रा पर चंदेरी पहुँचा। यहाँ के हरे-भरे माहौल की जमकर तारीफ करते हुए पर्यटकों ने कहा कि जो असीम मानसिक सुकून और शांति उन्हें चंदेरी में मिली, वह देश के किसी अन्य कोने में महसूस नहीं हुई।

'मध्य स्वदेश' बना यादों की निशानी 

भ्रमण के दौरान विदेशी पर्यटकों के बीच प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'मध्य स्वदेश' विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। जब सैलानियों को यह पता चला कि अखबार ने उनके चंदेरी आगमन और अनुभवों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विदेशी मेहमानों ने अत्यंत चाव और गर्व के साथ 'मध्य स्वदेश' की प्रतियों को अपने हाथों में थामकर तस्वीरें खिंचवाईं। सैलानियों ने समाचार की निष्पक्षता और इसके शानदार प्रस्तुतिकरण की दिल खोलकर सराहना की। चंदेरी की इन अनमोल यादों को संजोने के लिए वे अखबार की प्रतियों को अपने साथ सात समंदर पार ले गए और कहा कि यह समाचार पत्र उनके लिए यात्रा का एक यादगार दस्तावेज बन चुका है, जिसे वे अपने देश में अपने मित्रों और परिजनों को दिखाएँगे।

इतिहास और विरासत से कराया गया रूबरू 

समूह के लीडर सूर्य प्रताप सिंह के साथ चंदेरी पहुँचे इस दल ने स्थानीय गाइड और विरासतों के विशेषज्ञ कल्ले भाई (मुजफ्फर अंसारी) के मार्गदर्शन में अपने भ्रमण की शुरुआत की। यात्रा के पहले दिन पर्यटकों ने चंदेरी दुर्ग, महान संगीतज्ञ बैजू बावरा की समाधि, नौखंडा महल, खिलजीकालीन मस्जिद, खूनी दरवाजा, हवा पौर, श्री बालाजी मंदिर तथा सदियों पुरानी ऐतिहासिक गलियों का दीदार किया। इस दौरान सैलानियों को प्रत्येक स्मारक के इतिहास, उसकी अनूठी स्थापत्य कला, सांस्कृतिक महत्व और चंदेरी के विभिन्न राजवंशों व शासकों से जुड़े रोचक ऐतिहासिक प्रसंगों की विस्तार से जानकारी दी गई।

'चंदेरी को वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए' 

दल के लीडर सूर्य प्रताप सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे आगरा की भीड़भाड़ और व्यस्त माहौल से निकलकर चंदेरी की शांत, प्राकृतिक और सुकून भरी विरासत का अनुभव करने यहाँ आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि चंदेरी का शांत वातावरण, चारों ओर फैली हरियाली, ऐतिहासिक स्मारकों की भव्यता और यहाँ के लोगों का आत्मीय एवं स्वागतपूर्ण व्यवहार पूरे दल को बेहद प्रभावित कर रहा है। उनके अनुसार चंदेरी वास्तव में एक विश्वस्तरीय विरासत है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलनी चाहिए।

 

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