दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पिछली हार के बाद इस सीट पर पार्टी ने नया चेहरा उतारकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने पूर्व हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष और संगठन से जुड़े नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारकर साफ संकेत दिया है कि इस बार चुनाव में संगठन और नए राजनीतिक समीकरणों पर भरोसा किया जाएगा। उनके नाम की घोषणा के साथ ही दतिया की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।
यह सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का विषय मानी जा रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव हो रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद चुनाव का रास्ता साफ हुआ और इसके तुरंत बाद बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगा दी।
कौन हैं आशुतोष तिवारी ?
आशुतोष तिवारी मूल रूप से दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र के रहने वाले हैं। छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा है। लंबे समय तक उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में भारतीय जनता पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें ग्वालियर संभाग में संगठन मंत्री की जिम्मेदारी भी मिल चुकी है।
हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं
शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान आशुतोष तिवारी को मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। कार्यकाल के दौरान उन्होंने आवासीय योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। पार्टी उन्हें साफ छवि और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में पेश करती रही है।
2023 में भी टिकट के दावेदार थे
विधानसभा चुनाव 2023 में आशुतोष तिवारी ने सेवढ़ा सीट से बीजेपी टिकट की दावेदारी की थी। हालांकि उस समय पार्टी ने प्रदीप अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया था। इस बार दतिया उपचुनाव में उन्हें मौका देकर बीजेपी ने संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नेता पर भरोसा जताया है।
नरोत्तम मिश्रा की जगह नया चेहरा
दतिया को लंबे समय तक पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। उपचुनाव से पहले उनका नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल था और उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीदा था। लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस बार स्थानीय समीकरणों, संगठन की राय और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नया चेहरा मैदान में उतारा है।
बीजेपी की रणनीति क्या है
आशुतोष तिवारी को टिकट देकर बीजेपी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी केवल बड़े चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय संगठन से जुड़े नेताओं को भी अवसर देने की नीति पर आगे बढ़ रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को पूरी तरह एकजुट रखते हुए इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने की होगी। वहीं कांग्रेस भी इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।