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भोपाल में पुलिसिंग में बदलाव

भोपाल पुलिसिंग में बड़ा बदलाव: UP मॉडल खत्म, अब केरलम मॉडल पर चलेगी राजधानी की पुलिस

भोपाल में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश मॉडल की जगह अब केरलम मॉडल लागू किया गया है। नई व्यवस्था में थानों का बंटवारा और जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं।


भोपाल पुलिसिंग में बड़ा बदलाव up मॉडल खत्म अब केरलम मॉडल पर चलेगी राजधानी की पुलिस 

राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के तहत अब थानों में केरलम मॉडल लागू किया गया है। एक जुलाई से इसकी शुरुआत मिसरोद थाने से की गई है। इस व्यवस्था के तहत एक थाने को दो हिस्सों में बांटकर कानून-व्यवस्था और अपराध जांच की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को सौंपी गई है। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली का मॉडल अपनाया गया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर अब नई व्यवस्था लागू की गई है।

पर्यवेक्षण छोड़कर बाकी सभी कार्यों का बंटवारा

मिसरोद थाने में मंगलवार को निरीक्षक विमल राय की पदस्थापना की गई। वे विदिशा जिले से भोपाल आए हैं। इससे पहले थाने का प्रभार निरीक्षक रतन सिंह परिहार के पास था। दोनों राज्य पुलिस सेवा के एक ही बैच के अधिकारी हैं, हालांकि विमल राय 25 दिन वरिष्ठ हैं।नई व्यवस्था के तहत नर्मदापुरम रोड को आधार मानते हुए थाने का क्षेत्र दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्से की जिम्मेदारी विमल राय और दूसरे हिस्से की जिम्मेदारी रतन सिंह परिहार को सौंपी गई है। फिलहाल यह व्यवस्था मौखिक आदेशों के आधार पर लागू की गई है। दोनों अधिकारियों को पुलिस उपायुक्त (जोन-2) विकास शाहवाल ने इसकी जानकारी दे दी है। नई कार्ययोजना के तहत दोनों निरीक्षकों को छह-छह बीट सौंपी जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश मॉडल में सामने आई थीं समस्याएं

करीब तीन महीने पहले शहर में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई थी। उस व्यवस्था में एक निरीक्षक को कानून-व्यवस्था और दूसरे निरीक्षक को विवेचना (जांच) का दायित्व दिया गया था। हालांकि इस व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने नई कार्यप्रणाली पर काम शुरू किया।

पुलिस महानिदेशक की पहल पर माइक्रो बीट व्यवस्था

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना की पहल पर जनवरी 2025 में माइक्रो बीट व्यवस्था को लेकर अध्ययन कराया गया था। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर कुछ अपराधों की जांच का अधिकार सिपाही से लेकर एएसआई स्तर तक देने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए प्रदेश के टियर-1 शहरों के चुनिंदा थानों का चयन किया गया था। अब उसी रिपोर्ट के आधार पर इस व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है।

चार की जगह बनीं 12 माइक्रो बीट

पुलिस आयुक्त संजय कुमार का उद्देश्य माइक्रो बीट प्रणाली को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना है। छह महीने पहले पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सभी थानों की बीट व्यवस्था में बदलाव किया गया था।मिसरोद थाने में पहले केवल चार बीट थीं, लेकिन माइक्रो बीट प्रणाली लागू होने के बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 12 कर दी गई है। माइक्रो बीट का निर्धारण संबंधित क्षेत्र में अपराध की दर के आधार पर किया गया है। उदाहरण के तौर पर जाटखेड़ी क्षेत्र में अपराध अधिक होने के कारण वहां चार माइक्रो बीट बनाकर करीब 20 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं समान क्षेत्रफल वाले निखिल कॉलोनी इलाके में केवल दो माइक्रो बीट बनाई गई हैं।

 

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