भोपाल में समग्र आईडी की जांच के दौरान पांच लाख से ज्यादा डुप्लीकेट और फर्जी आईडी का पता चला है, जिससे सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका है।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए बनाई गई समग्र पहचान पत्र व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। राजधानी भोपाल में समग्र डेटा की जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले में 31 लाख से अधिक समग्र आईडी धारकों में से 11 लाख 64 हजार से ज्यादा लोगों ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है। वहीं, जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि करीब पांच लाख समग्र आईडी फर्जी या डुप्लीकेट हो सकती हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर दो से तीन समग्र आईडी मिलने से प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
31 लाख में सिर्फ 19 लाख आईडी ही आधार से लिंक
आंकड़ों के मुताबिक भोपाल जिले में अब तक 31 लाख 18 हजार 715 लोगों की समग्र आईडी बनाई गई है। इनमें से केवल 19 लाख 48 हजार 693 आईडी ही आधार से लिंक हो सकी हैं, जबकि 11 लाख 64 हजार 837 लोगों की ई-केवाईसी अब भी लंबित है। समग्र सेल के अधिकारियों का कहना है कि आधार लिंकिंग के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लीकेट रिकॉर्ड सामने आए हैं।
राजधानी में 11 लाख लोगों की ई-केवाईसी अटकी
प्रदेश सरकार की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाओं में समग्र आईडी अनिवार्य है। आय, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस, बीपीएल, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं में इसी आईडी का उपयोग किया जाता है। ऐसे में फर्जी या डुप्लीकेट समग्र आईडी सामने आने से योजनाओं में गड़बड़ी और अपात्र लोगों को लाभ मिलने की आशंका बढ़ गई है।
एक व्यक्ति, कई समग्र आईडी
जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति के नाम पर दो से तीन समग्र आईडी बनाई गई थीं। आशंका है कि कुछ लोगों ने अलग-अलग आईडी बनवाकर सरकारी योजनाओं का कई बार लाभ लिया। इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए अब आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी अभियान को तेज किया गया है।
24 हजार फर्जी आईडी पहले ही हो चुकीं निरस्त
समग्र डेटा को शुद्ध करने के लिए आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति के नाम पर दो से तीन समग्र आईडी बनाई गई थीं। ऐसे डुप्लीकेट रिकॉर्ड को चिह्नित कर हटाने की कार्रवाई की जा रही है। पिछले तीन महीनों में लगभग 24 हजार समग्र आईडी निरस्त की जा चुकी हैं।
"समग्र डेटा को शुद्ध करने के लिए आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जांच के दौरान कई डुप्लीकेट रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिन्हें चिह्नित कर हटाया जा रहा है।"
- विकास गुप्ता, नोडल अधिकारी, समग्र सेल