भोपाल में 700 आंगनवाड़ियों को अब भी किराये के भवनों में चलाया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने की योजना अधूरी पड़ी है। कलेक्टर ने इस पर नाराजगी जताई है।
करीब 2 हजार केंद्रों में सिर्फ 34 सरकारी स्कूल परिसरों में संचालित, कलेक्टर ने जताई नाराजगी; 2,548 कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू।
राजधानी भोपाल में आंगनवाड़ियों को शासकीय स्कूल परिसरों में संचालित करने की योजना अब तक धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी है। जिले की करीब 2 हजार आंगनवाड़ियों में से केवल 34 केंद्र ही सरकारी स्कूल परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जबकि लगभग 700 आंगनवाड़ियां आज भी किराये के भवनों से चल रही हैं। ऐसे में बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की योजना अधूरी नजर आ रही है।
बच्चों को नहीं मिल रहीं जरूरी सुविधाएं
आंगनवाड़ियों को स्कूल परिसरों में संचालित करने का उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ पेयजल, शौचालय, खेल मैदान, सुरक्षित भवन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा शुरू होने से पहले ही बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होता है, जिससे आगे की पढ़ाई में भी उन्हें आसानी होती है।हालांकि अधिकांश आंगनवाड़ियां अब भी किराये के भवनों में संचालित हो रही हैं। कई केंद्रों में जगह की कमी, जर्जर भवन और आधारभूत सुविधाओं का अभाव बच्चों की सुरक्षा और विकास दोनों पर असर डाल रहा है।
विशेषज्ञों ने दी चरणबद्ध स्थानांतरण की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी आंगनवाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से शासकीय स्कूल परिसरों में स्थानांतरित किया जाए तो बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय भी मजबूत होगा।
कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने समीक्षा बैठक में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि किराये के भवनों में संचालित सभी आंगनवाड़ियों को जल्द से जल्द शासकीय स्कूलों में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने पूछा कि अब तक यह कार्य पूरा क्यों नहीं हो सका। साथ ही जर्जर भवनों में संचालित आंगनवाड़ियों को तत्काल खाली कराने के निर्देश भी दिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
2,548 पदों पर होगी भर्ती
मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेशभर की आंगनवाड़ियों में 2,548 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें 781 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 1,767 सहायिकाओं के पद शामिल हैं।भर्ती संबंधित बाल विकास परियोजनाओं के तहत होगी और संबंधित गांव या शहरी वार्ड की स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 13 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन शुल्क 100 रुपये के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी देय होगा। आवेदन में त्रुटि होने पर 15 जुलाई तक संशोधन का अवसर मिलेगा।