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भोपाल में बारिश से निगम के दावे धुले

बारिश में डूबे भोपाल ने खोली नगर निगम की तैयारियों की पोल, मदद को तरसे लोग

भोपाल में हुई जबरदस्त बारिश ने नगर निगम की मानसून से निपटने की तैयारियों के दावों को नकारते हुए शहर को पानी-पानी कर दिया। अधिकारी 'आउट ऑफ रीच', नागरिक परेशान।


बारिश में डूबे भोपाल ने खोली नगर निगम की तैयारियों की पोल मदद को तरसे लोग

मानसून पूर्व तैयारियों के निगम के सारे दावे बारिश में धुले

जबरदस्त तेज बारिश ने भोपाल नगर निगम के दावों की ऐसी पोल खोली कि शहर पानी-पानी हो गया और जिम्मेदार अफसर 'आउट ऑफ रीच' हो गए। जलभराव और दूसरी समस्याओं से जूझते लोग मदद के लिए निगम अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, लेकिन या तो कॉल नहीं लगी या जवाब मिला कि उनका तबादला हो चुका है। बाद में पता चला कि कई अफसर अपने सरकारी मोबाइल और नंबर नए पदस्थ अधिकारियों को सौंपे बिना ही जा चुके हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार एमपी नगर, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, अयोध्या बायपास, करोंद, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड, बैरागढ़, अशोका गार्डन और पिपलानी समेत कई इलाकों से जलभराव की शिकायतें सामने आईं। इस बीच पार्षदों ने आरोप लगाया कि आपात स्थिति के दौरान कई जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क तक नहीं हो सका।इस समस्या के मद्देनजर कांग्रेस पार्षद नाराज दिखे। इनमें से एक, गुड्डू चौहान ने आरोप लगाया कि नगर निगम के करीब 60 प्रतिशत अधिकारी अपने सरकारी मोबाइल नंबरों पर कॉल रिसीव नहीं करते। जानकारों का कहना है कि रात के समय अधिकांश कॉल सीधे वॉयस मेल पर चली जाती हैं, जबकि जलभराव और अन्य आपदा संबंधी स्थितियों में यही समय सबसे अधिक संवेदनशील होता है।

वहीं भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने कहा कि नगर निगम की ओर से जनप्रतिनिधियों के साथ आपदा प्रबंधन को लेकर कोई प्रभावी समन्वय व्यवस्था नहीं बनाई गई। उनका कहना है कि जब पार्षद ही अधिकारियों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, तो आम नागरिकों को समय पर राहत मिलना मुश्किल हो जाता है। पार्षदों का यह भी आरोप है कि कई सरकारी मोबाइल नंबर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। विभाग बदलने के बाद भी कुछ अधिकारी पुराने सरकारी नंबर अपने पास रखे हुए हैं, जबकि नए अधिकारी निजी नंबरों से काम कर रहे हैं। कई मामलों में सरकारी नंबरों पर अधिकारी की बजाय उनके परिजन फोन रिसीव करते हैं।

नगर निगम आयुक्त का पक्ष

नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने पार्षदों के आरोपों पर कहा, "जिन पार्षदों को कोई शिकायत है, वे सीधे हमसे संपर्क करें। मानसून की तैयारियों के तहत पंप, डी-सिल्टिंग, लाइफगार्ड और जनरेटर की व्यवस्था की गई है। प्री-मानसून ड्रिल भी कराई गई है और सभी संसाधनों के साथ कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।"

बारिश से सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी

शनिवार को राजधानी में हुई तेज बारिश ने नगर निगम के साथ बिजली कंपनी के सारे दावों की पोल खोल दी। दूसरी ओर, 100 से ज्यादा इलाकों में बिजली गुल रही। उधर, गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के हाल ही में नवीनीकरण किए गए सी-ब्लॉक बॉयज हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर पानी भर गया। इसका वीडियो रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर सवाल उठने लगे हैं।शिवाजी गली, मस्जिद वाली गली और आसपास के इलाकों में सड़कें तालाब जैसी नजर आईं।

उफनते नाले में फंसे बुजुर्ग की पुलिस ने बचाई जान

हनुमानगंज थाना पुलिस ने साहस और तत्परता का परिचय देते हुए तेज बहाव वाले नाले में फंसे एक बुजुर्ग की जान बचा ली। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों को पुट्ठा मिल, अग्रवाल तिराहा के पास नाले से मदद की आवाज सुनाई दी।मौके पर पहुंचने पर करीब 60 वर्षीय अज्ञात बुजुर्ग सिर में चोट लगने के बाद नाले में फंसा मिला। बारिश के कारण नाले का बहाव तेज था और बुजुर्ग दलदल में धंस गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक मोहित शिवहरे बिना देर किए नाले में उतर गए और बुजुर्ग को संभाले रखा।

इसके बाद आरक्षक राजेंद्र रघुवंशी, उप निरीक्षक रामसजीवन और एफआरवी टीम ने संयुक्त प्रयास से कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आरक्षक मोहित शिवहरे ने मौके पर ही सीपीआर देकर उसके मुंह से पानी निकाला और उसकी सांसें सामान्य कीं। इसके बाद पुलिसकर्मी ऑटो से उसे हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। उपचार के बाद डॉक्टरों ने बुजुर्ग की हालत खतरे से बाहर बताई।

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