बस्तर में बड़े नक्सली कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण की खबर। सरकार का दावा—माओवाद खत्म होने के करीब, विकास को मिलेगी रफ्तार।
नक्सली कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद कोई बड़ा नेता नहीं बचा
तेजी से नक्सलमुक्त हो रहे बस्तर से एक बड़ी खबर सामने आई है। दोरला जनजाति के डीकेएसजेडसी रैंक के माओवादी पापाराव 12 साथियों के साथ पुनर्वास के लिए जगदलपुर पहुंच रहे हैं। पापाराव के पास एके-47, एसएलआर सहित भारी मात्रा में हथियार मौजूद हैं। पापाराव के आत्मसमर्पण को शासन की ‘पुना मार्गेम’ योजना की बड़ी उपलब्धि और माओवाद के ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है।
पुष्ट खबरों के मुताबिक, पापाराव नक्सल संगठन डीकेएसजेडसी का शीर्ष नेता है। उसके साथ दर्जनभर नक्सली आत्मसमर्पण करने जगदलपुर आ रहे हैं। इस टीम में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं।
खात्मे की सीमा को छह दिन बाकी
जब यह खबर आपके सामने होगी, तब नक्सलवाद के खात्मे की समय-सीमा को महज 6 या 7 दिन ही शेष रह जाएंगे। इस लिहाज से पापाराव का आत्मसमर्पण बस्तर में माओवाद के ताबूत पर आखिरी कील माना जा रहा है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी कहा है कि माओवाद लगभग समाप्त हो चुका है और बस्तर में अमन एवं विकास की बयार बहने लगी है।खबरों के मुताबिक, पापाराव और अन्य नक्सली बीजापुर से रवाना होकर जगदलपुर पहुंचेंगे और संभवतः बुधवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। इस दौरान वे अपने सभी हथियार पुलिस को सौंप देंगे।
यह आत्मसमर्पण बस्तर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृहमंत्री विजय शर्मा का दावा है कि पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर और छत्तीसगढ़ में इस स्तर का कोई नक्सली नेता नहीं बचेगा। जो बचे हैं, वे तेलंगाना जा चुके हैं। अब यहां पापाराव जैसा कमांडर स्तर का कोई नक्सली नहीं है।बस्तर में अब केवल एरिया कमेटी और पार्टी सदस्य स्तर के कुछ नक्सली ही रह गए हैं, और वे भी हथियारविहीन हैं। ये नक्सली भी धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं। तेजी से नक्सलमुक्त हो रहे बस्तर के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। नक्सलमुक्त होने के साथ ही बस्तर के विकास के द्वार खुल गए हैं।
बस्तर संभाग के सुदूर, बीहड़ और अति नक्सल प्रभावित गांवों में अब बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। जिन माओवादियों ने विकास और जनसुविधाओं पर लंबे समय तक ग्रहण लगाया था, अब उन्हीं के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।