शिवनवरात्रि में राजा स्वरूप में विराजे बाबा महाकाल

शिवनवरात्रि में राजा स्वरूप में विराजे बाबा महाकाल

By : Swadesh Bhopal
शिवनवरात्रि में राजा स्वरूप में विराजे बाबा महाकाल

शिवनवरात्रि के अवसर पर रविवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई और पूरे परिसर में मंत्रोच्चार गूंज उठा।

जलाभिषेक और पंचामृत पूजन

पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले मंदिर में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” के साथ जल अर्पित किया गया।

भांग-चंदन से श्रृंगार, फिर भस्म अर्पण

कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। श्रृंगार पूरा होने पर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म रमाई गई। शिवनवरात्रि के कारण भस्म अर्पण का विशेष महत्व रहा।

आभूषणों से सजा राजा स्वरूप

भस्म के बाद बाबा महाकाल को भांग, ड्रायफ्रूट, चंदन, आभूषण और फूलों से राजा स्वरूप में सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और मोगरा-गुलाब के सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

साकार दर्शन की मान्यता

भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल साकार रूप में दर्शन देते हैं। शिवनवरात्रि के कारण इस दर्शन को विशेष पुण्यकारी माना जाता है.बड़ी संख्या में श्रद्धालु तड़के मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूरे मंदिर परिसर में “जय महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे।

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