Breaking News
  • स्वदेश के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > प्रदेश > उत्तर प्रदेश

Sitapur Nazul Land Controversy

Sitapur Nazul Land Controversy: नजूल पर प्रशासन की जल्दबाजी! नीति अभी तय नहीं, बेदखली की कार्रवाई पहले क्यों?

नजूल भूमि को लेकर सीतापुर में चल रही कार्रवाइयों ने अब कार्रवाई के आधार और सरकारी अभिलेखों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


sitapur nazul land controversy नजूल पर प्रशासन की जल्दबाजी नीति अभी तय नहीं बेदखली की कार्रवाई पहले क्यों

Sitapur Nazul Land Controversy: नजूल पर प्रशासन की जल्दबाजी! नीति अभी तय नहीं, बेदखली की कार्रवाई पहले क्यों? |

हिमांशु सिंह, सीतापुर: नजूल भूमि को लेकर सीतापुर में चल रही कार्रवाइयों ने अब कार्रवाई के आधार और सरकारी अभिलेखों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नजूल जागरण अभियान के संयोजक एवं अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने प्रशासन से पूछा है कि जब प्रस्तावित नई नजूल नीति अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है तो उसके संभावित प्रावधानों की दिशा में नागरिकों को बेदखल करने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है?

उन्होंने कहा कि “विधायिका कल क्या कानून बनाएगी, यह कार्यपालिका आज कैसे तय कर सकती है?” यदि भविष्य की नीति में पुराने पट्टेदारों के लिए नियमितीकरण, लीज नवीनीकरण अथवा फ्रीहोल्ड जैसे विकल्प आए और तब तक लोगों को उनकी संपत्ति से बेदखल कर दिया गया तो होने वाली अपूरणीय क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा?

‘सरकारी रिकॉर्ड से नागरिक का अधिकार चुनौती, लेकिन रिकॉर्ड ही जनता से दूर!’

प्रेस वार्ता में सबसे तीखा सवाल बुक नंबर-1 और मूल नजूल रजिस्टर को लेकर उठाया गया। आशीष मिश्रा के अनुसार, नजूल संपत्तियों पर कार्रवाई में सरकारी अभिलेखों को आधार बनाया जा रहा है, लेकिन नागरिकों को उन्हीं मूल अभिलेखों का निरीक्षण कराने में स्पष्टता नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई 2026 को आरटीआई के जरिए नजूल रजिस्टर, बुक नंबर-1, फार्म-45 समेत अन्य अभिलेखों की जानकारी मांगी गई थी। 20 अगस्त को नगर पालिका परिषद के जन सूचना अधिकारी की ओर से जवाब दिया गया। जवाब में मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए आरटीआई के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

क्या बोले आशीष मिश्रा?

“जिस रिकॉर्ड के आधार पर किसी नागरिक की संपत्ति पर सवाल खड़ा किया जा रहा है, वही रिकॉर्ड नागरिक को दिखाने में क्या परेशानी है? रिकॉर्ड है तो निरीक्षण कराइए, दूसरे विभाग के पास है तो संरक्षक बताइए और नहीं है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक कीजिए।”

सीतापुर में एक-दो नहीं, कई पुराने नजूल मामले सवालों के घेरे में 

प्रेस वार्ता में सपा कार्यालय, मिशन/मेबल जोंस स्कूल, अशरफ मंजिल, रानी कोठी, घंटाघर क्षेत्र और शहर कांग्रेस कार्यालय समेत कई मामलों का उल्लेख किया गया। कहा गया कि इन घटनाओं को अलग-अलग कार्रवाई मानने के बजाय सीतापुर में नजूल संपत्तियों को लेकर अपनाई जा रही समग्र प्रशासनिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। घंटाघर के दशकों पुराने नगर पालिका किरायेदारों को हटाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई। वहीं पुराने बैनामे, नामांतरण और नगर पालिका कर अभिलेख रखने वाले संपत्ति स्वामियों में भी कार्रवाई को लेकर आशंका जताई गई।

गोंडा की घटना से उठा बड़ा सवाल—प्रशासन की सीमा कहां तक?

गोंडा के पुराने नजूल भूमि विवाद का हवाला देते हुए आशीष मिश्रा ने कहा कि लंबित न्यायिक मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा न्यायिक अधिकारी से कथित संपर्क और दबाव के आरोपों पर हाई कोर्ट की गंभीर प्रतिक्रिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन की रक्षा करना प्रशासन का अधिकार है, लेकिन न्यायालय में लंबित विवाद में न्यायिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है। आरोप सही हैं या गलत, इसका निर्णय जांच से होना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक शक्ति की संवैधानिक सीमा स्पष्ट रहनी चाहिए।

मुरली निवास पर भी प्रशासन से कार्रवाई की मांग

तामसेनगंज स्थित ऐतिहासिक मुरली निवास का मामला भी उठाया गया। आशीष मिश्रा ने इसकी नजूल स्थिति, ट्रस्ट के अधिकार और कथित व्यावसायिक उपयोग अथवा हस्तांतरण से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि आचार्य नरेंद्र देव से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षण देकर स्मृति स्थल अथवा अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी विचार होना चाहिए।

प्रशासन से सात सवाल, जवाब का इंतजार

1. सीतापुर की नजूल भूमि का मूल रिकॉर्ड आखिर कहां है?
2. बुक नंबर-1 और मूल नजूल रजिस्टर का निरीक्षण जनता को क्यों नहीं कराया जा रहा?
3. आरटीआई में मांगी गई उपलब्ध सूचनाएं स्पष्ट और पूर्ण रूप से क्यों नहीं दी गईं?
4. प्रत्येक बेदखली की कार्रवाई का वर्तमान कानूनी आधार क्या है?
5. नई नजूल नीति अंतिम रूप से लागू नहीं हुई तो उसके संभावित प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई क्यों?
6. भविष्य की नीति बदली तो आज की बेदखली से हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
7. न्यायालयों द्वारा मांगे गए नजूल अभिलेख समय से प्रस्तुत क्यों नहीं किए जा रहे?

‘नजूल के नाम पर कार्रवाई का विरोध नहीं, लेकिन कार्रवाई का आधार सार्वजनिक होना चाहिए’

आशीष मिश्रा ने कहा कि अभियान किसी अवैध कब्जे के समर्थन में नहीं है। सरकारी भूमि की रक्षा सरकार का अधिकार है, लेकिन नागरिक के अधिकार समाप्त करने की प्रक्रिया भी कानून और रिकॉर्ड के मुताबिक ही होनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपने पुराने पट्टे, बैनामे, नामांतरण, कर रसीद, आवंटन पत्र और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन से टकराव उद्देश्य नहीं है, लेकिन “पारदर्शिता से समझौता भी नहीं होगा।” यदि मूल अभिलेख सार्वजनिक करने, आरटीआई में उपलब्ध सूचनाएं देने और न्यायालयों में आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो अभियान का अगला चरण लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर मामले को प्रदेश स्तर पर उठाने का होगा। प्रेस वार्ता में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव बुद्धि प्रकाश मिश्र, आलोक यादव, रीना वाशिंगटन, उदय प्रताप त्रिवेदी, अमिकिरण अवस्थी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

Related to this topic: