अमेरिका ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइल से सीमित लेकिन शक्तिशाली हमले की तैयारी में है। ट्रम्प को प्लान बताया गया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी सेना ने संभावित हमले के लिए नए विकल्प तैयार किए हैं। इनमें हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल है। व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में सेंट्रल कमांड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बताया कि अगला कदम छोटा लेकिन बेहद प्रभावी हो सकता है। इस प्लान का मकसद ईरान की बची हुई सैन्य ताकत, नेतृत्व और अहम ठिकानों को एक साथ निशाना बनाना है।
हाइपरसोनिक मिसाइल से हमले की रणनीति
अमेरिकी रक्षा विभाग अब एडवांस हथियारों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। ‘डार्क ईगल’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइल इस रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है। करीब 3200 किलोमीटर तक मार करने वाली यह मिसाइल बेहद तेज और सटीक मानी जाती है। इसका लक्ष्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और रणनीतिक ठिकाने हो सकते हैं।
इसके साथ ही B-1B लांसर बॉम्बर विमानों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है, जो भारी हथियारों के साथ हाइपरसोनिक सिस्टम ले जाने में सक्षम हैं।
ट्रम्प के संकेत और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर “तूफान आगे बढ़ रहा है” लिखकर संकेत दिया कि हालात और बिगड़ सकते हैं। ईरान की तरफ से भी जवाब उतना ही सख्त आया। सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा कि हमलावरों को फारस की खाड़ी में जगह नहीं मिलेगी। दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि यह टकराव सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी बन चुका है।
तेल बाजार में उथल-पुथल और वैश्विक असर
तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर दिखा। कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह पिछले चार साल का उच्च स्तर है। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई। लेकिन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। जहां तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
जमीनी मोर्चे पर बढ़ती हलचल
मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती और आवाजाही इस बात का संकेत देती है कि तैयारी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। वहीं, गाजा जा रहे मदद के जहाजों को इजराइल ने रोक दिया। जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि संघर्ष अब कई मोर्चों पर फैलता जा रहा है।
युद्ध का असर आम लोगों तक पहुंचा
ईरान के आंकड़ों के मुताबिक, हालिया घटनाओं में 40 से ज्यादा समुद्री कामगारों की मौत हो चुकी है। इनमें नाविक, मछुआरे और बंदरगाह कर्मचारी शामिल हैं। ईरान ने यह भी दावा किया है कि इस संघर्ष की कीमत अमेरिकी जनता को भी चुकानी पड़ रही है। हर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की बात कही गई है। इस तरह यह टकराव सिर्फ देशों तक सीमित नहीं रहा। वहीं, आम लोगों की जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है।
अरब देशों को चेतावनी और कूटनीतिक दबाव
ईरान के नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर उनके शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। अरब देशों को चेतावनी दी गई है कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी सैन्य कार्रवाई के लिए न हो। साथ ही ईरान ने दोहराया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव में कोई फैसला स्वीकार नहीं करेगा।