डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 3 दिन में सीजफायर मानने की चेतावनी दी है। तेल पाइपलाइन ब्लास्ट की आशंका जताई गई है। इस बीच होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक बाजार पर असर दिख रहा है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के पास युद्ध समाप्त करने और सीजफायर पर सहमत होने के लिए केवल तीन दिन का समय है। इसके बाद हालात और गंभीर हो सकते हैं, खासकर तेल आपूर्ति को लेकर।
तेल पाइपलाइन पर दबाव की आशंका
ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान तेल निर्यात नहीं कर पाता है, तो पाइपलाइन के अंदर दबाव बढ़ सकता है। उनका दावा है कि इस स्थिति में तकनीकी कारणों से पाइपलाइन फटने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, जिससे ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा।यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर बना हुआ है।
ईरान का सख्त रुख, ‘रेड लाइन’ पर अडिग
वहीं Iran ने न्यूक्लियर कार्यक्रम और Strait of Hormuz को लेकर किसी भी समझौते से इनकार किया है। ईरान ने इन दोनों मुद्दों को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है.सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह संदेश कूटनीतिक माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान का कहना है कि वह अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा।
कूटनीतिक गतिविधियां तेज
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi हाल के दिनों में पाकिस्तान, ओमान और रूस जैसे देशों के संपर्क में रहे हैं। वे रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात के लिए मॉस्को पहुंचे हैं, जहां क्षेत्रीय हालात और संभावित समाधान पर चर्चा हो सकती है।
बाजारों पर असर, तेल कीमतों में उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आई है।हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली और शेयर बाजारों में उछाल दर्ज किया गया।
वैश्विक चिंता बढ़ी
मौजूदा स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे इस संकट को और जटिल बना रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि किसी भी निर्णय का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।