मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच राइफल के साथ फोटो पोस्ट कर ट्रम्प ने ईरान को दी सख्त चेतावनी दी है। इसके बाद ईरान UN पहुंचा। क्या बढ़ रहा है टकराव? जानिए पूरी कहानी और असर।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राइफल के साथ फोटो शेयर कर सीधा संदेश दिया अब नरमी खत्म। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत पहले ही धीमी पड़ चुकी है। ट्रम्प के तेवर ने संकेत दिया कि आने वाले दिन और सख्त हो सकते हैं।
उधर ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए यूनाइटेड नेशन्स (UN) का दरवाजा खटखटाया है। मामला अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा।
'नो मोर मिस्टर नाइस गाय'
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जो फोटो पोस्ट की, उसमें वह राइफल के साथ नजर आए। तस्वीर पर लिखा था 'नो मोर मिस्टर नाइस गाय'। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। ट्रम्प ने साफ कहा कि ईरान को अब जल्दी फैसला लेना होगा। उन्होंने परमाणु वार्ता की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई और संकेत दिया कि अमेरिका अब और इंतजार के मूड में नहीं है।
ईरान ने UN पहुंचाया मामला
ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने सीधा अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख किया। United Nations Security Council में शिकायत दर्ज कराई गई। ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यह कदम बताता है कि ईरान इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाकर दबाव बनाना चाहता है।
38 लाख बैरल तेल जब्ती पर विवाद
ईरान के मुताबिक अमेरिका ने उसके दो जहाजों को कब्जे में लिया और करीब 38 लाख बैरल तेल जब्त कर लिया। तेहरान का दावा है कि यह ‘समुद्री डकैती’ जैसा कदम है। ईरान इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दखल मान रहा है। अगर यह विवाद बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका का सख्त रुख और बढ़ता खर्च
अमेरिकी रक्षा तंत्र ने भी साफ कर दिया है कि रुख नरम नहीं होगा। पेंटागन अधिकारियों के अनुसार, इस टकराव में अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह खर्च बताता है कि मामला सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव की दिशा में बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
परमाणु मुद्दे पर कोई समझौता नहीं?
अमेरिकी नेतृत्व ने साफ कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ट्रम्प प्रशासन का यह रुख पहले से ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है। अंदरूनी राजनीति में भी इसे ताकत दिखाने के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता। ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या यह तनाव बातचीत से सुलझेगा या टकराव और बढ़ेगा?