पीओके के रावलकोट में हजारों लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राशन, महंगाई और बिजली संकट के बीच JAAC ने इस्लामाबाद पर गंभीर आरोप लगाए। जानिए आंदोलन क्यों लगातार बड़ा होता जा रहा है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आया है। रावलकोट में हजारों लोग ईदगाह ग्राउंड पर जुटे और इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं ने दावा किया कि क्षेत्र की जनता आर्थिक और राजनीतिक उपेक्षा से तंग आ चुकी है।
प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, खाद्यान्न आपूर्ति, बिजली दरों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर पाकिस्तान सरकार को घेरा। इस दौरान कई नारों और भाषणों में पाकिस्तान की नीतियों का खुलकर विरोध किया गया, जिससे इलाके में चल रहा आंदोलन अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक स्वरूप भी लेता दिखाई दे रहा है।
रावलकोट में हजारों लोगों ने दिखाई ताकत
प्रदर्शन का केंद्र रावलकोट का ईदगाह ग्राउंड रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटे। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय जनता अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर आवाज उठा रही है। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और प्रशासन पर जनता की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए।
आर्थिक संकट से राजनीतिक आंदोलन तक
आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बिजली बिलों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों से हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ इलाकों में खाद्यान्न और जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित की गई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ीं। अब यही असंतोष राजनीतिक मांगों और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे से भी जुड़ गया है।
JAAC ने लगाए गंभीर आरोप
JAAC के नेता सरदार अम्मान खान ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रशासन दबाव की रणनीति अपना रहा है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। संगठन का दावा है कि उसका अभियान 38 मांगों पर आधारित है, जिनमें महंगाई, बिजली सब्सिडी, रोजगार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख हैं।
सरकार की कार्रवाई से बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के अनुसार, JAAC और उससे जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत कार्रवाई की गई है। संगठन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका आंदोलन पूरी तरह जनहित के मुद्दों पर आधारित है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मामला मानकर देख रहा है।
बिजली, संसाधन और भरोसे का सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जलविद्युत उत्पादन होने के बावजूद स्थानीय लोगों को महंगी बिजली और सीमित सुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि संसाधनों का लाभ दूसरे क्षेत्रों को मिलता है, जबकि स्थानीय जनता को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही। इसी असंतोष ने आंदोलन को लगातार व्यापक रूप दे दिया है।