पाकिस्तानमें सरकारी कर्मचारियों को साइकिल का इस्तेमाल करने को कहा, सर्कुलर जारी कर कहा कि साइकिल चलाने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नेपाल में भी दो दिन की छुट्टी मिलेगी।
वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते अब Pakistan में लोग सड़को पर आने लगे हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच सरकार ने आदेश जारी कर कर्मचारियों को साइकिल से ऑफिस आने की सलाह दी है। इस कदम को खर्च कम करने और ऊर्जा बचत के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। वही लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर भारत में फ्यूल की दिक्कत क्यों नहीं आ रही है। भारत में न तो ईधन के दाम बढ़े हैं और नहीं पैट्रोल डीजल के लिए लाइन लग रही है।
लाहौर से जारी सर्कुलर, साइकिल अपनाने की अपील
Lahore स्थित सिविल सर्विसेज अकादमी ने 3 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया। इसमें BS-01 से BS-19 तक के कर्मचारियों को साइकिल को प्राथमिक यातायात साधन के रूप में अपनाने के लिए कहा है। सर्कुलर में कहा गया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते ईंधन की खपत कम करना जरूरी हो गया है। साथ ही, साइकिल चलाने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे कर्मचारियों का व्यक्तिगत खर्च भी कम होगा।

आदेश में स्वैच्छिक लिखा लेकिन मानना जरूरी
प्रशासन ने इसे अनिवार्य नहीं किया है, बल्कि स्वैच्छिक रूप से अपनाने की अपील की है। हालांकि, इसे एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि पाकिस्तान में ऊर्जा संकट किस स्तर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल आर्थिक दबाव को कम करने के लिए नहीं, बल्कि वैकल्पिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान लंबे समय से कर्जे में डूबा रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति बाधित होने से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
नेपाल में भी दिखा असर, हफ्ते में 2 दिन छुट्टी
वहीं Nepal में भी ईंधन संकट को देखते हुए सरकार ने सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन की छुट्टी लागू कर दी है। अब शनिवार के साथ रविवार को भी कार्यालय बंद रहेंगे। सरकार की प्रवक्ता Sasmita Pokharel ने बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।
दफ्तरों के समय में बदलाव
नेपाल सरकार ने कार्यालय समय भी बदल दिया है। अब दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेंगे, ताकि सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके। दक्षिण एशिया के इन दोनों देशों के फैसले यह संकेत देते हैं कि वैश्विक ऊर्जा संकट अब आम जनजीवन और सरकारी व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी ऐसे कदम देखने को मिल सकते हैं।