नेपाल के पीएम बालेन शाह ने शिक्षा सुधारों की घोषणा की है। स्कूलों में छात्र राजनीति पर बैन और 5वीं तक परीक्षा खत्म करने का फैसला लिया गया है।
नेपाल में नई सरकार बनते ही बड़े फैसलों की शुरुआत हो गई है। बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद संभालते ही शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलावों का ऐलान किया है। यह आने वाले समय में देश के स्कूल-कॉलेज सिस्टम को पूरी तरह बदल सकते हैं।
दरअसल, 27 मार्च 2026 को नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले बालेन शाह ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 100 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। जिसमें शिक्षा सुधार सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा।
स्कूल-कॉलेज में छात्र राजनीति पर बैन
सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर रोक लगा दी है। सरकारी निर्देश के मुताबिक, सभी राजनीतिक छात्र संगठनों को तय समय के भीतर कैंपस खाली करना होगा। उनकी जगह 90 दिनों के भीतर गैर-राजनीतिक 'छात्र परिषदें' बनाई जाएंगी। ताकि छात्रों की आवाज बिना किसी राजनीतिक दबाव के सामने आ सके। सरकार का मानना है कि इससे पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा और कैंपस में होने वाली खींचतान खत्म होगी।
सरकारी कर्मचारियों पर भी सख्ती
नई नीति के तहत सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए भी राजनीतिक दलों से जुड़ाव पर रोक लगाने की बात कही गई है। साथ ही पक्षपातपूर्ण ट्रेड यूनियनों को खत्म करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे प्रशासन को पूरी तरह निष्पक्ष बनाया जा सके।
5वीं तक नहीं होगी कोई परीक्षा
शिक्षा सुधारों में एक बड़ा फैसला यह भी है कि अब कक्षा 5वीं तक के बच्चों के लिए पारंपरिक परीक्षाएं खत्म कर दी जाएंगी। इसके बजाय छात्रों का मूल्यांकन वैकल्पिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से किया जाएगा, ताकि बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव कम हो और वे बेहतर तरीके से सीख सकें।
यूनिवर्सिटी सिस्टम में भी बदलाव
सरकार ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे तय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार ही रिजल्ट जारी करें। इसके अलावा एडमिशन प्रक्रिया को आसान बनाते हुए नागरिकता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।