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Israel Attack Lebanon 254 Dead Iran Ceasefire Row

लेबनान में तबाही का मंजर: इजराइली हमलों में एक दिन में 254 मौतें, राष्ट्रीय शोक घोषित

लेबनान में इजराइली हमलों में 254 लोगों की मौत, 1100 से ज्यादा घायल। ईरान ने सीजफायर पर उठाए सवाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव।


लेबनान में तबाही का मंजर इजराइली हमलों में एक दिन में 254 मौतें राष्ट्रीय शोक घोषित

लेबनान में इजराइल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने पूरे देश को हिला दिया है। एक ही दिन में 254 लोगों की मौत और 1165 से अधिक के घायल होने के बाद सरकार ने राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है। राजधानी बेरूत समेत कई इलाकों में तबाही का मंजर है, जहां इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं और राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है। अस्पतालों में घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग

लेबनान सरकार ने हालात को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की अपील की है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि देश के सभी कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों का इस्तेमाल कर हमलों को रोकने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संगठनों ने नागरिकों की मौत पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

सीजफायर पर टकराव

सीजफायर को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। इजराइल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि “सीजफायर और जंग साथ-साथ नहीं चल सकते।” इस बयानबाजी ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे हालात और ज्यादा जटिल होते नजर आ रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती

तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर टोल लगाने की योजना बनाई है। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना लागू होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा।

दुनिया पर बढ़ता खतरा

विश्व बैंक, IMF और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि मध्य-पूर्व में बढ़ता संघर्ष वैश्विक खाद्य संकट को जन्म दे सकता है। तेल और उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि से खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं, जिससे खासकर गरीब और विकासशील देशों पर बड़ा असर पड़ेगा।मध्य-पूर्व में जारी यह टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर पड़ता दिख रहा है।

 

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