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Iran mocks US ceasefire claims

'ताकत होती तो अब तक जीत चुके होते': ईरान का अमेरिका पर तीखा हमला, सीजफायर दावों पर तंज

ईरान ने अमेरिका के सीजफायर दावों को खारिज करते हुए कहा—अगर ताकत होती तो अब तक जीत चुके होते। मिडिल ईस्ट जंग में बयानबाजी और हमले दोनों तेज।


ताकत होती तो अब तक जीत चुके होते ईरान का अमेरिका पर तीखा हमला सीजफायर दावों पर तंज

Iran News |

मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब सिर्फ मिसाइलों और सैन्य ताकत की नहीं रह गई है। अब यह बयानबाजी की लड़ाई भी बनती जा रही है। ईरान ने इस बार सीधे अमेरिका को निशाने पर लेते हुए उसके सीजफायर दावों का मजाक उड़ा दिया है। सरकारी टीवी पर जारी एक बयान में ईरानी सेना के प्रवक्ता ने जो कहा, उसने माहौल और गर्म कर दिया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि फिलहाल बातचीत की जमीन तैयार होती नहीं दिख रही।

ईरान के प्रवक्ता पर तीखा हमला

ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका जिस ताकत की बात करता है, वह अब नाकामी में बदल चुकी है। उनका कहना था कि अगर अमेरिका के पास सच में वो ताकत होती, तो अब तक हालात बदल चुके होते। उन्होंने  कहा कि अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए। इसके साथ ही ये भी जोड़ा कि अमेरिका के 'खोखले वादों' का दौर खत्म हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रम्प लगातार सीजफायर की कोशिशों का दावा कर रहे हैं।

संसद का भी सख्त संदेश

सिर्फ सेना ही नहीं, ईरान की राजनीतिक नेतृत्व भी सख्त रुख दिखा रही है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा कि तेहरान क्षेत्र में अमेरिका की हर गतिविधि पर नजर रख रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जनरलों की गलतियों को सैनिक ठीक नहीं कर सकते है। हमारे इरादे परखने की कोशिश मत करो। इस बयान को अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के संदर्भ में देखा जा रहा है। खासकर तब जब खबरें हैं कि अमेरिका अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1000 सैनिक मिडिल ईस्ट भेज रहा है।

इजराइल पर 40 मिनट में 4 मिसाइल

जमीनी हालात भी कम तनावपूर्ण नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने 40 मिनट के भीतर इजराइल की ओर चार मिसाइलें दागीं। तेल अवीव और आसपास के इलाकों में धमाकों की आवाज सुनी गई। हालांकि नुकसान कितना हुआ है इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

 बातचीत को लेकर क्या बोले ईरानी राजदूत

इस बीच पाकिस्तान में तैनात ईरानी राजदूत रजा अमीरी मोगदाम ने भी अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि न तो सीधी और न ही परोक्ष रूप में किसी भी तरह की बातचीत अब तक नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने ये जरूर माना कि कुछ दोस्त देश दोनों पक्षों के बीच संपर्क में हैं, ताकि जंग खत्म करने का रास्ता निकाला जा सके

इजराइल की तरफ से क्या संकेत?

उधर इजराइल की तरफ से भी बयान सामने आया है। वित्त मंत्री निर बरकात ने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू मिलकर हालात को संभाल रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जिससे ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए, और अमेरिका-इजराइल की स्थिति मजबूत बनी रहे।

जंग के साथ-साथ बयानबाजी भी तेज

कुल मिलाकर तस्वीर यही है कि एक तरफ मिसाइलें चल रही हैं, दूसरी तरफ शब्दों की जंग भी उतनी ही तेज है। सीजफायर की बात हो रही है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। फिलहाल, कोई भी पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिखता है।

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