सीजफायर के कुछ घंटों बाद ईरान की तेल रिफाइनरी पर हमला और कुवैत पर ड्रोन अटैक का दावा। 28 ड्रोन मार गिराने की बात, क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ा।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर हमले और कुवैत पर ड्रोन अटैक के दावों ने हालात को और जटिल बना दिया है।
लवन आइलैंड रिफाइनरी पर हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लवान द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी को सुबह करीब 10 बजे निशाना बनाया गया। हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब कुछ ही घंटे पहले सीजफायर की घोषणा की गई थी।
कुवैत का दावा: 28 ड्रोन मार गिराए
कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान की ओर से ड्रोन हमले किए गए। प्रवक्ता कर्नल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी के मुताबिक, अब तक 28 ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ड्रोन देश के दक्षिणी हिस्सों तक पहुंचे और अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इन ठिकानों में तेल प्लांट, बिजली घर और पानी के डीसैलिनेशन प्लांट शामिल हैं, जहां नुकसान की खबर है।
सीजफायर के बाद बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिन के तनाव के बाद दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी थी। ट्रंप ने बताया था कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व की अपील के बाद लिया गया।
ईरान का 10 पॉइंट प्लान
ईरान ने अमेरिका को 10 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कई अहम शर्तें शामिल हैं:
सभी सैन्य हमलों को पूरी तरह बंद करना
आर्थिक प्रतिबंध (सैंक्शन) हटाना
फ्रीज किए गए फंड और संपत्तियों की वापसी
युद्ध का स्थायी अंत
मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना की वापसी
युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई
होर्मुज जलमध्यडमरू पर नियंत्रण बनाए रखना
जहाजों की आवाजाही ईरान के समन्वय में
प्रति जहाज शुल्क वसूली का प्रस्ताव
क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने की मांग
ईरान का दावा: हमारी शर्तों पर समझौता
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने इस 10 पॉइंट प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया जा रहा है।
क्षेत्र में बढ़ता असमंजस
सीजफायर के तुरंत बाद हमलों की खबरों ने मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे घटनाक्रम जारी रहते हैं, तो शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।