ईरान ने पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी हटाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन ट्रम्प परमाणु कार्यक्रम रोकने की शर्त पर अड़े रहे।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया से बड़ी खबर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि ईरान पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और समुद्री नाकेबंदी हटाने के लिए तैयार हो गया है, इसके बदले उसने अमेरिका और इजराइल से युद्ध रोकने तथा आगे हमला नहीं करने की गारंटी मांगी है,। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चाहता है कि पहले युद्ध और नाकेबंदी जैसे तत्काल मुद्दों का समाधान निकाला जाए, जबकि अमेरिका इस बात पर अड़ा है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा पहले सुलझाया जाए। इसी टकराव के कारण बातचीत फिर अटक गई है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार, एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ दिखाई देने लगा है।
क्या है ईरान का नया प्रस्ताव?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो और भविष्य में हमला न करने की गारंटी दी जाए इसके बाद अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाए और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति दे।
ईरान ने यह भी कहा है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर बाद में बातचीत की जा सकती है। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि अगर पहले होर्मुज खोल दिया गया तो अमेरिका की बातचीत की ताकत कमजोर पड़ जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर क्यों फंसी बातचीत?
अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान अगले 20 वर्षों तक अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे और अपने पास मौजूद लगभग 440 किलो समृद्ध यूरेनियम अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंप दे। ईरान ने इन शर्तों को अस्वीकार्य बताया है।
इससे पहले ईरान ने एक और प्रस्ताव दिया था, जिसमें उसने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकने और उसके बाद सीमित स्तर पर नागरिक उपयोग के लिए संवर्धन की अनुमति रखने की बात कही थी। साथ ही उसने अपने यूरेनियम भंडार का हिस्सा रूस को सौंपने का भी प्रस्ताव रखा था। लेकिन अमेरिका ने इसे भी खारिज कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार ईरान के पास 5 से 6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है इनमें से करीब 120 से 130 किलो यूरेनियम को 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इसे 90% तक एनरिच किया गया तो परमाणु हथियार बनाने की आशंका बढ़ सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया पर क्या असर?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. जंग और अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के चाबहार बंदरगाह के पास कई बड़े तेल टैंकर फंसे हुए हैं। जहाजों में तेल भरा होने के बावजूद वे आगे नहीं बढ़ पा रहे, अगर यह स्थिति लंबी चली तो ईरान को तेल उत्पादन कम करना पड़ सकता है।
इस संकट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमत लगातार सातवें दिन बढ़ी है। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों ने भी माना है कि होर्मुज बंद होने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
ईरान पर बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार रूस और पाकिस्तान के दौरे कर रहे हैं। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की है। रूस ने अमेरिका और इजराइल के हमलों की आलोचना की है, लेकिन अब तक ईरान को खुला सैन्य समर्थन नहीं दिया है।
फ्रांस ने कहा है कि समाधान तभी निकलेगा जब ईरान अपने रुख में नरमी दिखाए। वहीं जर्मनी ने अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। ईरान के भीतर भी इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या देश को समझौते की दिशा में बढ़ना चाहिए या सख्त रुख बनाए रखना चाहिए।
तेहरान में सरकार समर्थक रैलियां भी निकाली गई हैं, जहां लोगों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए। दूसरी ओर ईरानी मीडिया में यह चर्चा भी तेज है कि देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार दबाव में आ रहा है और उसके विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
ट्रम्प के सामने भी बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव
अमेरिका में ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ कानून के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए तय समय सीमा के भीतर संसद की मंजूरी लेनी होती है । रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन को 1 मई तक कांग्रेस से अनुमति लेनी पड़ सकती है।
हालांकि अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे पर मतभेद दिखाई दे रहे हैं कुछ रिपब्लिकन सांसद भी लंबे युद्ध के खिलाफ हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका की रणनीति और ईरान के साथ संभावित समझौते पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।