होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी मिसाइल हमले के बाद एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। वहीं, कई भारतीय घायल हुए हैं। घटना के बाद भारत ने ईरानी राजनयिक को तलब किया है।
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत तक पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई, जबकि छह भारतीयों समेत आठ लोग घायल हुए हैं। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में ईरान के उप राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया।
घटना के कुछ ही घंटे बाद अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार करीब पांच घंटे तक चले ऑपरेशन में ईरान के कई नौसैनिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
भारत ने ईरान से मांगा जवाब
विदेश मंत्रालय ने बताया कि हमले के वक्त दोनों टैंकरों पर 30 भारतीय नाविक मौजूद थे। एक भारतीय की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद भारत ने ईरान के उप राजदूत मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत ईरानी अधिकारियों को तलब किया। भारत ने घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में हिंसा रोकने की मांग की है।
अमेरिका ने कई सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
CENTCOM के मुताबिक अमेरिकी सेना ने बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों में ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली, ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं के साथ नौसैनिक ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि अभियान का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा बनाए रखना है।
होर्मुज को लेकर बढ़ा टकराव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा अमेरिका करेगा और इसके बदले कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। साथ ही ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े कारोबार पर नई पाबंदियां लागू करने का भी ऐलान किया गया। दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा और बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
कई देशों ने जताई चिंता
चीन ने अमेरिका और ईरान से तनाव कम करने और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री आवाजाही जल्द बहाल करने की अपील की है। कुवैत ने यूएई के तेल टैंकरों पर हुए हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। ब्राजील ने भी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अमेरिकी योजना की आलोचना की है।
तेल बाजार और वैश्विक सप्लाई पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यहां जहाजों की आवाजाही पिछले दो महीनों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।